कब तलक......हम राबता नईं तोड़ते, कब तलक........टुकड़े वफ़ा के जोड़ते, होश तो आया.........मगर कुछ देर में, कब तलक नईं मुंह को आख़िर मोड़ते... उर्मिला माधव... 26.7.2014...
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