तीरगी ऑ रौशनी में झूल मत, झूट के ख़ाबों को देना तूल मत, मैं फ़क़ीरों की तरह जीती हूँ बस, ये असासा ग़ैर का है भूल मत, उर्मिला माधव
No comments:
Post a Comment