ज़ख़्म सींते ही रहे हैं ग़म छुपाने के लिए, हो गए ख़ामोश तनहा इस ज़माने के लिए, दिल बहुत मासूम था प दिल्लग़ी सी होगई, रुख़ सभी बदला किये जब आज़माने के लिए ।।उर्मिला माधव...
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