कितने सारे सच कहने को जी करता है, ड्रामे हरगिज़ नईं सहने को जी करता है,
रोज़ दुहाई इश्क़ मुश्क की देते हैं जो, उनके मुंह पे "मर" कहने को जी करता है, Urmila Madhav
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