अय मुसाफ़िर दूर क्या जाता है तू, ये जो दूरी है,…..अज़ल से साथ है आंख में ...सरगर्मियां हैं अश्क़ की, इसलिए भी कम नज़र आता है तू, उर्मिला माधव, 26.7.2017
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