चिन्दियाँ दिल की समेटी जा रही हैं, कतरनें उड़ कर इधर को आ रही हैं, तेरी साँसों की महक सी लग रही है, तेरे दामन से लिपट कर आ रही हैं.. Urmila Madhav.. 27.7.2013
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