हालात कुछ अलग थे कि मिलना नहीं हुआ, या यूँ कहें कि घर से निकलना नहीं हुआ, वो यक़-ब-यक़ जो सामने आकर,चले गए, यूँ मुँह के बल गिरे कि संभलना नहीं हुआ.. उर्मिला माधव.. 10.7.2013
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