जिस्म ही बार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,
के जहां ख़ार नज़र आया ,बड़ी दूर तलक,
हर कलेजे को बहुत देर ठहर छान लिया,
गर्द-ओ गुब्बार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,
जो निगाहों से परखने की कभी जुरअत की,
सिर्फ अग्यार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,
ये नहीं था कि समझ कुछ न कभी आया हो,
हर तरफ़ दार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,
एक भी दिल न फरेबों से कभी खाली रहा,
झूठा गमख्वार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,
ख़ुद को सरताज बनाने की बड़ी कोशिश में,
बन्दा अय्यार नज़र आया बड़ी दूर तलक,
उर्मिला माधव...
21.8.2014...
अग्यार--- प्रतिद्वंदी...
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