कभी हूँ मां मुहम्मद की, कभी माता हूँ रघुवर की, मैं हिंदुस्तान की बेटी, कभी बहना हूं घर घर की, अकेली पासबाँ हूँ मैं, किसी तूफां के आने पर, चमक रखती हूं सोने सी मैं वो गहना हूँ घर भर की उर्मिला माधव
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