कमज़ोर हैं वो लोग जो खेमों के साथ हैं, तनहा हैं हम ज़रूर मगर एक बिसात हैं..... तहज़ीब के ही दायरे ......महदूद हैं हमें, हाँ भीड़ से अलग हैं मगर इक जमात हैं.... उर्मिला माधव... 3.8.2014...
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