Thursday, 29 August 2019

कुछ अशआर

उम्र भर चलते रहे और दो क़दम पहुंचे नहीं,
ये वो रस्ता है के जिसमें मील का पथ्थर नहीं..
उर्मिला माधव..

कभी एक बार ........मैं बेहोश होकर गिर गई थी,
अब अगर जो होश में आ जाऊं तो दुनियां न देखूं....

दर-ओ-दीवार में ख़ुद खोखले पथ्थर लगाते हैं,
हवा पर थोप कर इल्ज़ाम,अपना सर बचाते हैं....
उर्मिला माधव...

हाँ मैं पत्थर हूँ मुझे तुम तोड़ डालो,
खूब तबियत से मेरी किरचें उछालो,
जब जहाँ चाहे मेरे टुकड़े लगा कर,
तुम दरो दीवार की इज्ज़त बचालो.....
उर्मिला माधव....

दर-ओ-दीवार में ख़ुद खोखले पथ्थर लगाते हैं,
हवा पर थोप कर इल्ज़ाम,अपना सर बचाते हैं....
उर्मिला माधव...

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