हम लगाते रह गए बस अर्ज़ियाँ, थाम कर हाथों में अपने सीपियां
रह गए हम आख़री सफ़ में खड़े, सबने जी भर के समेटीं सुर्ख़ियां, उर्मिला माधव
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