एक लहर ख़ुशी की दौड़ गई जब सुना वतन आज़ाद हुआ, सब रन्ज-ओ-अलम से टूट गए जो आज़ादी के बाद हुआ आपस की छीना झपटी में, तक़सीम सभी कुछ कर डाला, बरपा है क़ह्र परचम के तले इस क़दर वतन बरबाद हुआ.. उर्मिला माधव.. 14.8.2016
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