ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 10 August 2019
क्या कीजिए
दिल जिगर नासाज़ थे ये बात वाजिब ही सही,
पर बला ये है शिकस्ता जिस्म का क्या कीजिये.
उर्मिला माधव,
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment