जीवन पथ पर चलते-चलते,पाँव मेरे भर आए हैं,
अद्भुत शीतल छाँव देखकर हम तरुवर तर आए हैं,
हमने चले बहुत लम्बे पथ और दूर कुछ जाना होगा,
करने को विश्राम सहज बस तनिक पाँव फ़ैलाए हैं
हरे भरे यदि वृक्ष न होंगे,पथिक कहाँ विश्राम करेंगे,
बहुत अधिक क्षति हो जाने से थोड़े वृक्ष ही बच पाये हैं..
उर्मिला माधव..
3.8.2013..
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