जाने कितने मद्फ़नों में मक़बरे ख़ाली रहे, ज़िन्दगी भर हाफ़िज़ों के मश्वरे जाली रहे, देने वाला ज़िन्दगी पर इस तरह हावी रहा, ज्यों अकेला दह्र में ख़ुद अख़्तरे आली रहे, 18.8.2017
No comments:
Post a Comment