अपनी हस्ती पर बुलन्दी का ग़ुमाँ रखते हैं जो, उनके दिल के आईने पर धूल कुछ होगी ज़रूर, अपने घर में नाक़ाबन्दी का समाँ रखते हैं जो, इसके मानी ये हुए के भूल कुछ होगी ज़रूर .. उर्मिला माधव..
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