एक अलग सा ख़याल--- ग़म को संग बांधे-बांधे फिरते हैं, अपना दम साधे-साधे फिरते हैं, वो न अब ज़िन्दगी में शामिल है, देखो हम आधे-आधे फिरते हैं... #उर्मिलामाधव.. 29.8.2015
No comments:
Post a Comment