तेरे गुलदान के सब फूल .....बासी हो गए होंगे, तो सूखी पत्तियों के ढेर ......काफ़ी हो गए होंगे, तुझे कुछ याद है मैंने सलाम-ए-सुब्ह कब भेजा ? तिरे घर के कई कोने भी ...ख़ाली हो गए होंगे, उर्मिला माधव, 4.8.2017
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