दिल से जब आह भी नहीं निकली, मुदत्तों .........ज़िन्दगी नहीं संभल जब तिरा.....ज़िक़्र भी गुनाह हुआ, फिर ये ..आवाज़ भी नहीं निकली.. उर्मिला माधव, 27.8.2017
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