Wednesday, 31 July 2019

जोड़ा है

बिखरी बिखरी साँसों में भी ख़ुद को ख़ुद से जोड़ा है,
हमको पर कुछ ख़ास समझ कर हर लम्हे ने तोड़ा है,
दिल को ये एहसास बहुत है क्या खोया क्या पाया है,
कभी कभी हालात समझ सब जान बूझ कर छोड़ा है..
उर्मिला माधव..
1.8.2013

दूसरा कोई नहीं

अपनी ज़ाती ज़िन्दगी में,बाख़ुदा कोई नहीं,
जो भी कुछ थे आप थे बस,दूसरा कोई नहीं,

कितने लम्बे रास्ते तनहा किये तय उम्र भर,
सबका इस्तकबाल था पर नाख़ुदा कोई नहीं,

सब अकेले ही उठाते अपनी वीरानी का बार,
कुल दहर का ये चलन है,बांटता कोई नहीं,

रोज़-ए-महशर सामने है और खड़े हैं रु-ब-रु,
इसकी मंजिल इन्तेहा है इब्तेदा कोई नहीं,

आह भी याहू की जौलानी सी लगती है मुझे,
इसलिए अब उससे बढ़कर या खुदा कोई नहीं,
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apnii zaatii zindagii main,baakhudaa koii nahin,
jo bhii kuchh the aap the bas dusra koii nahin,
kitne lambe raaste tanhaa kiye tay umr bhar,
sabkaa istaqbaal tha par na-khudaa koii nahin,
sab akele hii uthaate,apnii veeraanii kaa baar,
kul dahar kaa ye chalan hai,baant-taa koii nahin,
roz-e-mahshar saamne hai or khde hain ru-b-ru,
iskii manzil intehaa hai,ibtedaa koii nahiin,
aah bhii yaahoo kii jaulaanii sii lagtii hai mujhe,
isliye ab us-se badhkar,yaa khudaa koii nahin...
उर्मिला माधव....
1.8.2014...

ग़म गुसारी

"Aik she'r"
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ज़िन्दगी करती न हरगिज़ ग़म गुसारी,
एक दिन हल्का तो एक दिन ख़ूब भारी ...

zindagi kartii n hargiz.....gamgusaarii,
ek din halkaa to ek din khoob bhaarii....
उर्मिला माधव...
1.8.2015...

इश्तेहार

साज़िशें जब शिकार करती हैं,
ख़ूब जम-जम के वार करती हैं,
सादा इनसान कुछ न कह पाये,
आँखें ...ग़म इश्तेहार करती हैं...
उर्मिला माधव..
1.8.2016

इफ़्तेख़ार

रोज़ .....सदमे हज़ार लगते हैं,
और फिर ...बार-बार लगते हैं,
हम अकेले ही ख़ास जाहिल हैं,
हमको ग़म इफ्तेख़ार लगते हैं.....
उर्मिला माधव...
1.8.2016

इफ्तेख़ार--- गौरव... मान...

क्या करें

उनको ये उम्मीद,हम शिकवा करें,
दिल नहीं राज़ी हुआ हम क्या करें
उर्मिला माधव..

Tuesday, 30 July 2019

इत्तिला रहे

तुझसे जुदा हुए तो बहुत ग़म ज़दा रहे,
दिल भी तो ख़ुश नहीं हैं तुझे इत्तिला रहे,
उर्मिला माधव

सफाइयां

आने लगीं समझ में मुझे ....जब बुराइयां,
तब ठीक ही लगी हैं मुझे ...सब जुदाइयाँ
घेरे में साज़िशों के .जिया वक़्त को बहुत,
पर दी हैं ज़िन्दगी को कहाँ कब सफाइयां
उर्मिला माधव..
1.8.2016

शाहखर्च

ग़म से मिले निजात तो दुनियां को जीत लूँ
ग़म के मुआमले में ख़ुदा शाहख़र्च है,
उर्मिला माधव

चेहरे

चेहरे बदल सके ये ज़माने में दम नहीं,

तस्वीर का बदलना महज़ और बात है
उर्मिला माधव

Monday, 29 July 2019

तुम्हारी होती

चढ़ते तूफ़ाँ में कभी क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर बात तुम्हारी होती..
उर्मिला माधव..
30.7.2013

फ़ख़्र है

apne teeron ke muhaane pe hamen rakhkhe hain,
fakhr hai khud pe usoolon ke bahut pakke hain,
Urmila Madhav..
30.7.2013

Musahib

क्या परस्तारी मुहब्बत की मज़ा देगी तुझे,
देखले होकर मुसाहिब क़ातिबे तकदीर का....
उर्मिला माधव...
30.7.2014..

नज़ारा होता

dil ke sheeshe main agar tujhko utaara hota,
band aankhon se bahut khoob nazaara hota..
Urmila Madhav..
30.7.2013

मुसाहिब

क्या परस्तारी मुहब्बत की मज़ा देगी तुझे,
देखले होकर मुसाहिब क़ातिबे तकदीर का....
उर्मिला माधव...
30.7.2014..

जो अशआर अलका मिश्रा को दिए

ग़र समझना चाहते हो तुम कभी मेरा वजूद,
उम्र भर को माँग की सुर्ख़ी मिटा कर देखना...

एक से बढ़कर एक तीरंदाज़ थे,
मक़बरे सारे उलट कर देख ले..

सर तो हो लेकिन नहीं हो सर परस्त,
उस घड़ी तुम ज़िन्दगी को आज़माना..

इस क़दर रोते हुए वो फिर रहा था दर-ब-दर,
पाक़-ओ-ताहिर रूह वाले लोग बाहर आ गए...

क्यूँ कोई क़िस्सा करे,ग़म के मुतल्लिक जा-ब-जा ,
ज़ेहन-ओ-दिल इनसान के अब बर्फ़ के घर हो गए,

हाथ से चेहरे को ढक कर उसने देखा आइना,
फिर भी ग़म्माज़ी तो उंगली के झरोखे कर गए,

मिल ही जाते हैं दुनियां में,कभी कहीं कुछ प्यारे लोग,
ख़्वाबों की बुनियाद के अब भी, होते हैं रखवारे लोग,

जिस पे ज़ाहिर हैं ,ख़राबात तिरी दुनिया के,
उसको अब हश्र में जाने की ज़रूरत क्या है...

मेरी वफ़ा की शक़्ल ....बिगाड़ी है दह्र ने,
वरना मिरे मिजाज़ में तल्ख़ी कभी न थी...

यहाँ ख़ालिस मुलम्मेदार हैं,आक़ाओं के चेहरे,
हिफाज़त इक बहाना है,असल ये नाक़ाबन्दी है,
उर्मिला माधव
30.7.2016

दर्द हुआ

तुम दूर जब हुए तो बहुत दर्द भी हुआ,
जज़्बा,मुहब्बतों का मगर सर्द भी हुआ,
उर्मिला माधव

Kuchh nahin hota

Yaad karne se kuchh nahin hota,
Aah bharne se kuchh nahin hota,
Jaane waale kabhi nahin aate,
Chaah karne se kuchh nahin hota..
Urmila Madhav...
😢😢😢😢😢

और बात है

चेहरे बदल सके ये ज़माने में दम नहीं,
तस्वीर का बदलना मगर और बात है
उर्मिला माधव

Sunday, 28 July 2019

मेले

इंसानों के घर में .......मेले रहते हैं,
दिन भर ख़ाली भूत अकेले रहते हैं...
उर्मिला माधव

आज़माना

सर तो हो लेकिन नहीं हो सर परस्त,
ज़िन्दगी को उस घड़ी तुम आज़माना..
उर्मिला माधव...
29.7.2016

वजूद

गर समझना चाहते हो तुम कभी मेरा वजूद,
उम्र भर को माँग की सुर्ख़ी मिटा कर देखना...
उर्मिला माधव...
29.7.2016

Friday, 26 July 2019

आ रही हैं

चिन्दियाँ दिल की समेटी जा रही हैं,
कतरनें उड़ कर इधर को आ रही हैं,
तेरी साँसों की महक सी लग रही है,
तेरे दामन से लिपट कर आ रही हैं..
Urmila Madhav..
27.7.2013

कारीगरी है

आशिक़ों से आज जो दुनियां भरी है
ये मुहब्बत की अजब कारीगरी है...
उर्मिला माधव…

Thursday, 25 July 2019

ग़ालिबाना हक़

दिल में ....ऐसा आना-जाना कर दिया
जिस्म-ओ-जाँ तक शायराना कर दिया
आपके बिन ज़िन्दगी .......जंचती नहीं,
किस क़दर ...हक़ ग़ालिबाना कर दिया
उर्मिला माधव..
26.7.2013

नईं तोड़ते

कब तलक......हम राबता नईं तोड़ते,
कब तलक........टुकड़े वफ़ा के जोड़ते,
होश तो आया.........मगर कुछ देर में,
कब तलक नईं मुंह को आख़िर मोड़ते...
उर्मिला माधव...
26.7.2014...

मेरी ही तरह

तेरा मेरा सिर्फ़ इतना राबिता है,
तू भी इक इन्सां है, मेरी ही तरह,
मुझसे मिलती जुलती तेरी इक अदा है,
ख़ुद पे तू नाजां है मेरी ही तरह
उर्मिला माधव

चाक पर

अब तो कोई शक़्ल देदे,ज़िन्दगी को कूजागर,
या के अब बस चाक पर ही घूमना है उम्र भर,
उर्मिला माधव,
26.7.2017

आता है तू

अय मुसाफ़िर दूर क्या जाता है तू,
ये जो दूरी है,…..अज़ल से साथ है
आंख में ...सरगर्मियां हैं अश्क़ की,
इसलिए भी कम नज़र आता है तू,
उर्मिला माधव,
26.7.2017

क्यों हो

अश्क़ों के रोकने को,पलकों पे ज़ब्र क्यों हो
दिल को दबा के अपनी आहों पे ज़ब्त रखना,
उर्मिला माधव,
26.7.2018

मेरी ही तरह

तेरा मेरा सिर्फ़ इतना राबिता है,
तू एक भी इन्सां है, मेरी ही तरह,
मुझसे मिलती जुलती तेरी इक अदा है,
ख़ुद पे तू नाजां है मेरी ही तरह
उर्मिला माधव

बेवफ़ा रहे

एक शेर---

जितने क़रीबी दोस्त थे,सब बेवफ़ा रहे,
गैरों ने बढ़के मुझको सहारे बहुत दिए....
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jitne qariibii dost the ............sab be wafa rahe,
gairon ne badhke mujhko sahaare bahut diye...
#उर्मिलामाधव...
25.7.2015...

Tuesday, 23 July 2019

हिंदी मुक्तक

जब भावों का संसार नहीं क्या गीतों को  पहचानोगे ?
जब अंतर्मन में पीर नहीं, मन मीत कहाँ पहचानोगे?
और प्रीत नहीं पहचानोगे तो रीत कहाँ से जानोगे?
जब ह्रदय बीच झन्कार नहीं,संगीत कहाँ पहचानोगे?
उर्मिला माधव..

रोते हैं

किसीकी आँख रोती है, मेरे जज़्बात रोते हैं,
बहुत खामोश होकर हम गमे दौराँ में सोते हैं,
मेरी ख़ुद्दार साँसों ने बहुत हिम्मत दिखाय़ी है,
लहू गिर जाए आँखों से उसे भी ख़ुद संजोते हैं,
उर्मिला माधव..
24.7.2013

सुलझना

ज़ुल्फ़ को मेरी सुलझना ही कहाँ है??
आपसे हरगिज़ उलझना ही कहाँ है??
आज क्या दरक़ार होगी रहनुमायी??
आपको अपना समझना ही कहाँ है??
उर्मिला माधव..
24.7.2013

कर जाऊँ

एक मुलाक़ात तुमसे कर जाऊं,
चाहे फिर जितनी बार मर जाऊं,
मुझको चेहरा दिखाने आओ ना,
इससे पहले के मैं बिखर जाऊं.....
उर्मिला माधव...
24.7.2014...

तज़मीनी क़ता

तज़मीनी क़ता ------------

बानगी आसमान की मत रख,
अक्ल पूरे जहान की मत रख,
एक भी पल सुकूं भरा तो रहे,
हर घड़ी इम्तिहान की मत रख...
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baangii aasmaan kii mat rakh,
aql poore jahaan kii mat rakh,
ek bhii pal sukuun bhara to rahe,
har ghadii imtihaan kii mat rakh....
#उर्मिलामाधव...
2.7.2015..

बना दे मुझको

या तो मक़तल की अभी राह दिखादे मुझको,
वरना इस दह्र में ......दरवीश बना दे मुझको,
उर्मिला माधव,
24.7.2017

Monday, 22 July 2019

रखवारे लोग

मिल ही जाते हैं दुनियां में,कभी कहीं कुछ प्यारे लोग,
ख़्वाबों की बुनियाद के अब भी, होते हैं रखवारे लोग,
उर्मिला माधव...
23.7.2016

परिधियाँ

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

Sunday, 21 July 2019

तन्हाई

ऐसी तन्हाई मेरे गम को बहुत रास आई,
अब फ़क़त मैं हूँ यहाँ और...मेरी तन्हाई....
उर्मिला माधव...
22.7.2014...

हो नहीं सकती

अगर सीरत तुम्हारी चाँद तारों सी नहीं ऐ दोस्त,
तो हुस्न-ओ-सुख़न से मैं मुतास्सिर हो नहीं सकती...

Agar siirat tumhari chaand taron sii nahin ae dost,
To husn-o-sukhan se main mutassir ho nahin saktii ...
#उर्मिलामाधव..
22.7.2015..

Saturday, 20 July 2019

गिरती है

ये एक पुरानी पोस्ट जो मेरे दिल के बहुत नज़दीक है---

ज़मीं की भी तलहटी इतनी नीची हो नहीं सकती,
फ़क़त इंसान की ग़ैरत ही मुंह के बल भी गिरती है....
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zamiin kii bhii talahtii itnii neechii ho nahiin saktii,
faqat insaan kii gairat hii munh ke bal bhii girtii hai..
उर्मिला माधव...
21.7.2014

फेंके गए

जाने किस-किस ढंग से शिकवा किया उसने मगर,
कौन जाने  किस तरफ़ को तीर सब फेंके गए.....?
उर्मिला माधव,
21.7.2016

बह रहा हो कोई

ज़िन्दगी.....इस तरह से गुजरी है
इक कहानी सी कह रहा हो कोई,
जिसमें हर एक शख़्स ..नाज़िर है,
और ...रवानी में बह रहा हो कोई....
उर्मिला माधव...
21.7.2016

मोहतात

मोहतात हुए इतना ...हर इक शै के सितम से,
अब घर से निकलना भी गुज़र जाना है जी से...
उर्मिला माधव,

Wednesday, 17 July 2019

जोश में आ कर

मुहब्बत हो गई उनको वो बोले,जोश में आकर,
तो उसके आगे बोलेंगे,किसी आगोश में आकर,
ज़ेह्न बे होश था उस पर जुनून-ए-जाम भी तारी,
वफ़ा करना भी सीखेंगे,यों बोले होश में आकर..
उर्मिला माधव..
18.7.2016..

दह्र ने

मेरी वफ़ा की शक़्ल बिगाड़ी है दह्र ने,
वरना मिरे मिज़ाज में तल्ख़ी कभी न थी...
  उर्मिला माधव…

क्या है

जिस पे ज़ाहिर हैं ,ख़राबात तिरी दुनिया के,
उसको अब हश्र में जाने की ज़रूरत क्या है....
उर्मिला माधव....
18.7.2016

प्यार नहीं है

जो हंसके मिल रहे हैं उन्हें प्यार नहीं है,
कोई भी उलझनों का ख़रीदार नहीं है.....
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jo hanske mil rahe hain,unhen pyaar nahin hai,
koii bhii uljhanon ka khariidaar nahin hai...
उर्मिला माधव...
18.7.2014..

Tuesday, 16 July 2019

नज़र आते हैं

एक चेहरे में बहुत चेहरे नज़र आते हैं,
ये समझते ही,ख़यालात बिखर जाते हैं,
चाहे ज़ाहिद हों,बिरहमन हों,एक जैसे हैं
ऐसे रंगों में,सभी दिल से उतर जाते हैं..
उर्मिला माधव..
17.7.2013

ईद मुबारक

दुनियां के हर इंसान को हो ईद मुबारक़,
जो जिसके साथ हो वो उसे दीद मुबारक,
मफ़हूम मेरी बात का इतना ही है जनाब,
जो दिल से की गई है वो तनक़ीद मुबारक़....
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duniyaan ke har insaan ko ho iid mubaaraq,
jo jiske saath ho......wo use deed mubaaraq,
mafhoom merii baat ka...itnaa hii hai janaab,
jo dil se kii gaii hai.......wo tanqiid mubaaraq...
#उर्मिलामाधव....
17,7.2015

कहां कहां

करते फिरे नसीब से,झगड़ा कहाँ कहाँ
दामन जो तार तार था,बिखरा कहाँ कहाँ
उर्मिला माधव

जदीद शक़्ल

हमको फ़ना समझ के बहुत खुश वो हो गए,
ज़ाहिर हुई न जिनको, .हमारी जदीद शक़्ल..
उर्मिला माधव,
जदीद-- नई

Sunday, 14 July 2019

आ गए

भीड़ में इक मजमुआ हम शाया करके आ गए,
जाने क्यूं ऐसा लगा, सब ज़ाया करके आ गए,
दिल ही दिल में हमको ये महसूस सा होता रहा,
ख़र्च बस अल्फ़ाज़ का सरमाया करके आ गए,
उर्मिला माधव
bhiid men ek majmuaa ham shaya karke aa gaye,
jaane kyun aisaa lagaa sab zaayaa karke aa gaye,

dil hii dil men hamko ye mahsoos sa hotaa rahaa
kharch bas alfaaz ka sarmaayaa karke aa gaye,

जी करता है

कितने सारे सच कहने को जी करता है,
ड्रामे हरगिज़ नईं सहने को जी करता है,

रोज़ दुहाई इश्क़ मुश्क की देते हैं जो,
उनके मुंह पे "मर" कहने को जी करता है,
Urmila Madhav

नईं होते

दो चेहरे, चेहरे पे ......अच्छे नईं होते,
दूजे भी आकिल हैं, ...बच्चे नईं होते
काले दिल ऑ सोच फ़रेबी वा जी वा
ज़ाहिर है वो इंसां ….…सच्चे नईं होते,
उर्मिला माधव,
15.7.2017

हो गया

ज़िन्दगी ने इस क़दर ग़म देदिये,
हंसना रोना इक मआनी होगया
उर्मिला माधव,
15.7.2018

Friday, 12 July 2019

नाम है

बाक़ी की ज़ीस्त तुमसे जुदाई का नाम है,
तन्हाइयों का, ग़म का, ख़ुदाई का नाम है..
:::::::
baki ki zeest tumse judayi ke naam hai,
tanhaiyon ka ,ghum ka ,khudayi ka naam hai,
उर्मिला माधव..
13.7.2017

Thursday, 11 July 2019

ज़र्रा नवाज़ी

आप तो दिल से उतर के गिर गए हैं
अब नहीं कर पाएंगे ज़र्रा नवाज़ी,
उर्मिला माधव
12.7.2018

अल्लाह हो

ख़ूबसूरत हो तो क्या अल्लाह हो?
सब पसंदें मुख़्तलिफ़ रखते हैं जी,
उर्मिला माधव
12.7.2018

पत्थर हो गया

एक खता क्या होगई दिल दर्द का घर हो गया,
टूट ही जाता मगर ये जम के पत्थर हो गया,
उर्मिला माधव

Tuesday, 9 July 2019

ज़माने के लिए

ज़ख़्म सींते ही रहे हैं ग़म छुपाने के लिए,
हो गए ख़ामोश तनहा इस ज़माने के लिए,
दिल बहुत मासूम था प दिल्लग़ी सी होगई,
रुख़ सभी बदला किये जब आज़माने के लिए ।।उर्मिला माधव...

निकलना नहीं हुआ

हालात कुछ अलग थे कि मिलना नहीं हुआ,
या यूँ कहें कि घर से निकलना नहीं हुआ,
वो यक़-ब-यक़ जो सामने आकर,चले गए,
यूँ मुँह के बल गिरे कि संभलना नहीं हुआ..
उर्मिला माधव..
10.7.2013

Sunday, 7 July 2019

आती है

जब तलक आख़री शाम घिरके आती है,
ज़िन्दगी कितने तजुर्बों से गु़ज़र जाती है..
उर्मिला माधव..
8.7.2013

गुलाबों सी

देखो लड़की है इक गुलाबों सी,
इसकी आँखें हैं जैसे ख़ाबों सी,
इसको मालूम है नहीं कुछ भी,
दुनियांदारी है बस सराबों सी ...
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dekho ladkii hai ik gulaabon sii,
iskii aankhen hain jaise khaaon sii,
isko maaloom hai nahin kuchh bhii,
duniyaan daarii hai bas saraabon sii...
उर्मिला माधव...
7.7.2014...

इतना तो हो

हैं वफ़ा के रास्ते टेढ़े ............मगर इतना तो हो,
अपनी जानिब से वफ़ा का रंग बस हल्का न कर,
उर्मिला माधव

सजाया जाए

वक़्त आ जाए तो तक़लीफ़ न हो गिनने में
दिल के ज़ख्मों को करीने से सजाया जाए....
उर्मिला माधव...
8.7.2015

ज़र्क

ज़र्क दिल पर,दिमाग़ पर भी है,
अर्क आँखों का राख पर भी है,
कोई शिकवा नहीं मगर इसमें,
फ़र्क इज़्ज़त पै साख पर भी है,
उर्मिला माधव...
8.7.2015

पुरवाईयां

गिरहबंद क़ता...

ज़िन्दगी समझी नहीं कुछ ..वक़्त की गहराइयाँ,
और हम गिनते रहे,.....अपनी फ़क़त तन्हाईयाँ,
क़त्ल हमकोे कर दिया,मुतलक़ बिना तलवार के
ज़ह्र सी लगती रहीं यूँ........शह्र की पुरवाइयां..
उर्मिला माधव..
8.7.2015

बादशाहत

इस अहद की बादशाहत और जहन्नुम ज़िन्दगी,
बीच की कोई राह हो तो हमको भी बतलाइए ,
उर्मिला माधव
7.7.2019

Saturday, 6 July 2019

होता है

Ishq bas ittifaaq hota hai,
jismain insan khhaq hota hai..
Urmila Madhav....

पानी का

ये है उस्लूब....जिंदगानी का,
इब्तेदा में है अक्स फानी का,
सबके चेहरे के दाग़ धोकर भी,
चमका करता है रंग पानी का,
उर्मिला माधव...
7.7.2014...

ज़िन्दानी रहे

एक मतला--
___________
हिम्मत-ए-इन्सां रहे, ग़र ज़ीस्त ज़िन्दानी रहे,
और कुछ भी हो न हो बस आँख का पानी रहे,
उर्मिला माधव...
7.7.2015...

Thursday, 4 July 2019

जड़ दिया

याद मैंने उसको जब दिल से किया,
प्रश्न वाचक चिन्ह उसने जड़ दिया....
उर्मिला माधव...
5.7.2014

धुआं धुआं

बुझती है अगर आग तो अन्दर धुंआ-धुंआ,
बरहम है गर नज़र तो है मंज़र धुंआ-धुंआ,
उर्मिला माधव...
5.7.2014..

ख़ब्त

जो ख़ब्त में पला है उसे कुछ खबर नहीं,
ऐसे जुनूनी शख़्स की हरगिज़ सहर नहीं,
उर्मिला माधव...

ज़िंदगानी

क्यूं वज़्न-ए-ज़िंदगानी,उठता नहीं है आख़िर,
क्या पाँव थक गए हैं या ज़िन्दगी की राहें ?
उर्मिला माधव..
5.7.2017

Wednesday, 3 July 2019

तू भी

देख दिन हो गया ,निकल तू भी,
वरना ग़म तुझसे पहले पहुंचेगा...
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Dekh din ho gayaa ........nikal tuu bhii,
Warna gam tujhse pahle pahunchega....
#उर्मिलामाधव...
4.7.2015

रात दिन

बात करते हो ज़मीं की रात-दिन,
क्या ज़मीं पर बैठकर देखा भी है ?
हर कोई रखता है ख़ुशबू,ज़ेहन में.
ख़ुद को ख़ुशबू में कभी खोया भी है ?
उर्मिला माधव...
4.7.2016

कहते हैं

हम कहें शेर ....वो समझ भी लें,
हासिल-ए-लफ्ज़ इसको कहते हैं
उर्मिला माधव...
4.7.2015

सर टिका कर

तस्वीरी शेर---- Shayar Group

बरसात का वो मंज़र,.......किस दर्ज़ा ख़ूबरु था,
शब भर खड़े रहे हम.खिड़की पै सर टिका कर....
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barsaat ka wo manzar .....kis darzaa khubruu thaa,
shab bhar khade rahe ham khidkii pe sar tikaa kar...
#उर्मिलामाधव...
4.7.2015

अहसास ए तग़ाफ़ुल

ज़ाहिराना तौर पर,.............उसने मुहब्बत ख़ूब की
फ़िर भी अहसास-ए-तग़ाफ़ुल,ख़ुद-ब-ख़ुद ही हो गया..
उर्मिला माधव,
4.7.2017

भूल मत

तीरगी ऑ रौशनी में झूल मत,
झूट के ख़ाबों को देना तूल मत,
मैं फ़क़ीरों की तरह जीती हूँ बस,
ये असासा ग़ैर का है भूल मत,
उर्मिला माधव

पर जाए है

हादसों से ज़िन्दगी डर जाए है,
हर क़दम पे मौत बिन मर जाए है,
गर बुलावा ला मकां से आ गया,
जाना तो चाहे नहीं, पर जाए है,
Urmila. Madhav

Tuesday, 2 July 2019

ठूंठ पर

किस चमन की खूबियाँ गिनवा रहे हो ??
ठूंठ पर........बैठे नज़र क्यूँ आ रहे हो ??
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kis chaman kii khoobiyaan ginwaa rahe ho ??
thoonth par baithe nazar kyun aa rahe ho ??
उर्मिला माधव...
3.7.2014...

मनक़बत क्या है

Usko maaloom hai,galat kya hai,
Aisii harqat kii .maazirat kya hai,
Dil pe ...kya naagawaar guzrega,
Uspe gairon kii manqbat kya hai...
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उसको मालूम है,..ग़लत क्या है,
ऐसी हरक़त की माज़िरत क्या है
दिल पै ....क्या नागवार गुज़रेगा
उसपै ..गैरों की मनक़बत क्या है
उर्मिला माधव...
3.6.2015

Monday, 1 July 2019

हो नहीं सकता

तुम्हारा प्यार इस दिल के मुक़ाबिल हो नहीं सकता,
के जो दरक़ार है तुमसे....वो हासिल हो नहीं सकता....
उर्मिला माधव...
2.7.2014..

धन्नो

सुनो ये इश्क़ है धन्नो.....जो तुमको मिल नहीं पाया,
कि है ये जोड़ सोल्यूशन का बिलकुल हिल नहीं पाया...
उर्मिला माधव...

सोल्यूशन----- सुलोचन के नाम से जाना जाता है... :)

तहत

मैं तो शाइर हूँ..........चली आती हूँ,
अदबी दुनियां के सिलसिले के तह्त,
घूमना-फिरना .....इक शगल है मेरा,
यूँ न समझें ......किसी गिले के तह्त..
उर्मिला माधव..
2.7.2916