एक मतला एक शेर... तरही
वक़्त आकर ज़िन्दगी की तर्जुमानी लिख गया, कोई आया मेरे दिल पै पानी-पानी लिख गया,
दो घड़ी के वास्ते बस .....राह का साथी बना, जाने क्या सोचा के सर पै मेहरबानी लिख गया..... उर्मिला माधव 24.6.2015
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