सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं...आकर देख, जन जीवन की रीति यही है.अंतर्दृष्टि जगा कर देख, जब साहस उत्तुंग हुआ तब रीति-नीति का बिंदु कहाँ, मार्ग सहज ही मिल जाता है, आगे पाँव बढ़ाकर देख, उर्मिला माधव... 29.6.2014
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