जब से हुआ बिछोह तुम्हारा,तब ही से हम सोये नहीं हैं, स्वयम अश्रुधारा बहती है...राम कसम हम रोये नहीं हैं, दुविधाओं ने जीवन घेरा........स्थित-प्रज्ञ हुआ मन मेरा, कंटक जाल नियति ने सोंपे.....अपने हाथों बोये नहीं हैं .... #उर्मिलामाधव... 30.6.2015
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