Friday, 29 June 2018

राम कसम

जब से हुआ बिछोह तुम्हारा,तब ही से हम सोये नहीं हैं,
स्वयम अश्रुधारा बहती है...राम कसम हम रोये नहीं हैं,
दुविधाओं ने जीवन घेरा........स्थित-प्रज्ञ हुआ मन मेरा,
कंटक जाल नियति ने सोंपे.....अपने हाथों बोये नहीं हैं ....
#उर्मिलामाधव...
30.6.2015

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