वहाँ दैर-ओ-हरम अपना जहाँ सब आते-जाते हैं, बहुत शिद्दत से हम अपनी तमन्ना को निभाते हैं, न जाने कौन हो कितना मुबारक किसने जाना है जहाँ दिल सजदे करता हो वहीं हम सर झुकाते हैं... उर्मिला माधव... 21.6.2013
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