एक शायर दोस्त के नाम ...
हमारा क़द तुम्हारे क़द के सानी है नहीं तो क्या, बुलाहट की ये झूठी रस्म तुमने क्यों अदा की थी...... हमें कुछ और चाहे आज तक हरगिज़ न आया हो, ज़ेहन को ठेस पहुँचाने का जज़्बा हम समझते हैं... #उर्मिलामाधव 15.6.2015
No comments:
Post a Comment