जब भावों का संसार नहीं तब गीत कहाँ पहचानोगे? जब अंतर्मन में पीर नहीं,मन मीत कहाँ पहचानोगे? और प्रीत नहीं पहचानोगे तो रीत कहाँ से जानोगे? जब ह्रदय बीच झन्कार नहीं,संगीत कहाँ पहचानोगे? उर्मिला माधव.. 24.7.2013
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