Friday, 1 June 2018

मलाल है

ग़म की सियाह रात है …...जीना मुहाल है,
क्यूँ मुख़्तलिफ़ है इम्तिहाँ अब ये सवाल है?
तनहाइयों से लड़के .....ग़ुज़ारी है ज़िन्दगी,
अब तक भी हाथ ख़ाली हैं इसका मलाल है।
उर्मिला माधव.
7.3.2o13

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