जब कभी .....लांघी गई हैं वर्जनाएं, तब सदा .....आहत हुई हैं भावनाएं, क्या परिधियां .अर्थ अपने खो चुकीं? बच रही बस ......चीत्कारें,गर्जनाएं... उर्मिला माधव... 18.6.2017..
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