सर पर उढ़ाया शान से और ..क़ीमती कहा, लगता था कुछ क़फ़न सा मगर चूनरी कहा, इसको विदाई कहते हैं ....क्या ख़ूब रस्म है !! मर्ग़-ए-बशर की रूह को .क्यूँ ज़िंदगी कहा ?? उर्मिला माधव.. 12.6.2017
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