हसद हो आशिक़ी में तो, ज़रब आ जाए है दिल पर, हुए मग़रूर नाहक ही,ज़मीन-ओ-ज़र के हासिल पर, यही सब भूले जाते हैं ....के कुछ क़ायम नहीं रहता, सफ़ीने डूबते देखे हैं अक्सर .......जाके साहिल पर.. उर्मिला माधव.. 15.6.2016
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