Saturday, 23 November 2024

उजलत है

आपको दह्र बेशक़ीमत है,
हमको सब छोड़ने की उजलत है,

इसमें इज़्ज़त कहीं किसी की नहीं
आप कहते हैं, इसमें इज़्ज़त है,
उर्मिला माधव
दह्र--दुनिया
उजलत--जल्दी

Monday, 28 October 2024

दांव पे सारी दौलत

दांव पे सारी दौलत लगा दी गई
एक महफ़िल ही दर पे सजा दी गई,

अपनी तसवीर हर जा बना दी गई
आईनों से हक़ीक़त छुपा दी गई,

एक सीढ़ी कि जिससे गए बाम तक,
भीड़ समझी गई बस हटा दी गई,
उर्मिला माघव

Sunday, 27 October 2024

तसवीर तो लगाओ

तुम शेर कह रहे हो, तसवीर तो लगाओ,
कैसे पता चलेगा ये कौन कह रहा है?
उर्मिला माधव

Saturday, 19 October 2024

मिल गए ग़ालिब हज़ारों

मिल गए ग़ालिब हज़ारों, और कुछ अहमद फ़राज़,

इक सह्ल किरदार मिलना, ख़ास मुश्किल हो गया...
उर्मिला माधव

इंतेहा कहाँ होगी

ज़ब्त की इंतेहा कहाँ होगी
हमने मरते हुए भी आह न की 
उर्मिला माधव

अक़्ल से पैदल लड़की

No concern with facebook people..

ये तो सच है अक़्ल से पैदल है लड़की,
हां मगर वो शेर अच्छे कह रही है..

हंस के वो कहती है अपनी बात सारी,
रंज के साए में कब से रह रही है..
उर्मिला माधव

Friday, 18 October 2024

बदलती देखी है

मैंने दुनिया रोज़ बदलती देखी है,
नक़्क़ालों से ख़ासी फलती देखी है,
आप कहाँ हैं, क्या हैं, इसके क्या मानी,
खोटी-गोटी हर पल चलती देखी है,
उर्मिला माधव

Wednesday, 16 October 2024

रहना पड़ता है

टूटे फूटे पैरों से भी चलते रहना पड़ता है,
सूरज की मानिंद हमेशा ढलते रहना पड़ता है,
ख़ाब हमेशा टंगे रहे हों जब घर की दीवारों पर,
ताली वाले हाथों को भी मलते रहना पड़ता है,
उर्मिला माधव

हिज्र की हुज़ूर

रातें बहुत शुमार हुईं, हिज्र की हुज़ूर,
अब दिनकी मुश्किलों का भला क्या जवाब हो
उर्मिला माधव

जब मेरी इज़्ज़तों का

जब मेरी इज़्ज़तों का जनाज़ा निकल गया,
हर आदमी ही मुझसे शनासा निकल गया,

हाथों से रोकती थी मुक़द्दर को हर नफ़स,
कैसे बताऊँ बच के ज़रा सा निकल गया,
उर्मिला माधव

ऊपर उठो ना

अय मियाँ तुम इश्क़ से ऊपर उठो ना ज़िन्दगी इसके भी आगे ख़ूबरू है....
सारी दुनियां बस यहीं तक ही नहीं है,जो कि वक्ती तौर पर बस रु-ब-रु है......
उर्मिला माधव....

हमारे दिल जिगर में

हमारे दिल जिगर में भी हज़ारों दर्द पलते हैं,
समझ लो वज़्न ये सारे हमारे साथ चलते हैं...
उर्मिला माधव

साँसों का खेल

सिर्फ़ साँसों का खेल सारा है,
बेसबब जिस्म सबको प्यारा है,
उर्मिला माधव

सिमटना है

कभी हमसे लिपटना है,कभी खुद में सिमटना है,
समझ मैं ही नहीं आता हमें कैसे निपटना है?

मुहब्बत मैं नज़रबंदी हमेशा दिल से होती है,
जिसे कहते हैं सब हटना वही दरअस्ल सटना है.
उर्मिला माधव...

Friday, 4 October 2024

तुम्हें देखा तो ये जाना

तुम्हें देखा तो ये जाना कि दुनिया और भी कुछ है
वगरना पूछ लो उनसे जो तरसे हैं तबस्सुम को..
उर्मिला माधव

Sunday, 29 September 2024

दुख्तर ए जज़्बात हूँ

बेटियों की खातिर....

दुख्तर-ए-जज़्बात हूँ कुछ उन्सियत रख्खो ज़रा,
वरना इस दुनियां के सारे.....रास्ते मिट जायेंगे.....
उर्मिला माधव....
29.9.2014....

दुख्तर---- बेटी 
जज़्बात---भावनाएं 
उन्सियत---हमदर्दी

Tuesday, 17 September 2024

किसी ख़स्ता हाल से

Mujhko kahan gurez kabhi khasta haal se
Ho tiirgii ka sath zaraa zakhm dhak sakun
:;
मुझको कहाँ गुरेज़ कभी ख़स्ता हाल से,
हो तीरगी का साथ,ज़रा ज़ख्म ढक सकूँ..
#उर्मिलामाधव
18.9.2015

ख़ुश्क हो जाते हैं लब

ख़ाकसारी और बिमारी, दोनों बिल्कुल एक हैं,
दोनों ही हालात में तो ख़ुश्क हो जाते हैं लब,
उर्मिला माधव,

Sunday, 8 September 2024

उम्र से ज़्यादा

उम्र से ज़्यादः कोई जिंदा नहीं,
चार पल है सिर्फ़,आइन्दा नहीं,
बेहयाई ओढ़ के बैठा हुआ जो,
गलतियां करके भी शर्मिंदा नहीं....
उर्मिला माधव...
9.9.2014...

Saturday, 7 September 2024

uske inkar ko adaa kahiye

उसके इनकार को अदा कहिये,
दौर-ए-मुश्किल में और क्या कहिये,

आगे नज़रों के जो भी आजाये,
बा-अदब उसको ना खुदा कहिये,

ज़िन्दगी जिस तरह भी चलती हो,
शुक्रिया उसको बा दुआ कहिये ,

धडकनें दिल की साथ उड़ लेंगी,
जश्न-ए-दौरां में बस हवा कहिये,

दिल पै कितना ही कुछ गुज़रता हो,
उसको हरगिज़ न बे-वफ़ा कहिये
उर्मिला माधव...
19.10 2014...

तुम जीत भी जाओ

तुम जीत भी जाओ तो उसे.....हार समझना,
बे-मौक़ा वाह-वाह को.........बेकार समझना,
शेर-ओ-सुखन के हुस्न को जीता न कोई भी,
तारीफ़ की आवाज़ों को...बस प्यार समझना,
#उर्मिलामाधव 
8.9.2015

Sunday, 25 August 2024

सिलसिला चलता रहा

उसके दिल में ख़ामख़्वा ही सिलसिला,चलता रहा,
मेरी ख़ामोशी से उसको,हर सिला मिलता रहा..

दिल की ये संजीदगी, और उसका वो आवारापन
मेरा उसका राबिता इक शाम सा ढलता रहा,
उर्मिला माधव,
25.8.2017

Thursday, 22 August 2024

झुका रख्खा है

मैंने पहले ही बहुत ख़ुद को झुका रख्खा है,
अब ज़मीं मुझको मुहब्बत से सदा देती है...
#उर्मिलामाधव ...
23.8.2015...

हज़ारों रंग देखे हैं

हज़ारों रंग देखे हैं मेरी नज़रों ने घबरा कर,
मगर दिल ने मुझे जबरन बहकने से बचाया है...
#उर्मिलामाधव..
23.8.2015

Monday, 19 August 2024

कोई रहता था

ज़िंदगी मुझको ज़रा हद से गुज़र जाने दे,
कौन पूछेगा कभी कोई यहां रहता था,
उर्मिला माधव

Saturday, 17 August 2024

ख़ुदा की ज़ात

हम हैं फक़ीर दिल से हमें कुछ गिला नहीं ,
इस से भी बढ़के बात बड़ी है जगह-जगह ,

सर को झुकाया ज्यूँही इबादत की शक्ल में,
हरदम खुदा की ज़ात खड़ी है जगह-जगह ,
उर्मिला माधव....

Friday, 16 August 2024

तमाशा कर रहे हैं

प्यार में...जो तोला माशा कर रहे,
बे-सबब...समझो तमाशा कर रहे,
हक़ बयानी हमको रूसवा कर गई, 
रंज अब हम.....बे-तहाशा कर रहे....
उर्मिला माधव...
17.8.2014...

बुरा मान गए

हर नफ़स मैंने,तग़ाफ़ुल की अदा देखी है,
मैंने एक लहज़ा ज़रा की तो बुरा मान गए
उर्मिला माधव,
17.8.2016

तालिबे तक़दीर

हक़,हक़ीक़त और हुकूमत,ये कहाँ के लफ़्ज़ हैं?
हम रिआया हैं फ़क़त और तालिब-ए-तक़दीर हैं.
उर्मिला माधव.

बदहवास को

जो क़ाफ़िए और बह्र को रोते हैं रात दिन,
वो जानते कहाँ हैं, किसी बदहवास को,
जीते हैं अपने तौर पे, हम अब भी आज भी,
हम जानते कहाँ हैं, किसी ग़मशनास को...
उर्मिला माधव

Thursday, 15 August 2024

मुस्कुराते हैं

हम तो बस यूं ही मुस्कुराते हैं,
जी के रखने को आते जाते हैं,

खानुमा रख के ज़िन्दगानी को,
सब्र का हौसला बढ़ाते हैं
उर्मिला माधव

Sunday, 4 August 2024

देखा चाहिए

दूसरे क्या कर रहे हैं, देखना काफ़ी नहीं,
आपने क्या क्या किया है ये भी देखा चाहिए...
उर्मिला माधव
Mera betu🤗🤗

Saturday, 3 August 2024

कूज़ागरी देखें

कभी कूज़ागरी देखें, कभी शीशागरी देखें,
बहुत हैरतज़दा हो कर तिरी कारीगरी देखें

बज़ाहिर सामने सब कुछ नुमायां कुछ नहीं होता,
वो आंखें कौनसी हैं जो तिरी जलवागरी देखें,
उर्मिला माधव,

Friday, 26 July 2024

बर्फ़ के घर हो गए

क्यूँ कोई क़िस्सा करे,ग़म के मुतल्लिक जा-ब-जा ,
ज़ेहन-ओ-दिल इनसान के अब बर्फ़ के घर हो गए,
उर्मिला माधव

Thursday, 11 July 2024

ख़ूबसूरत

ख़ूबसूरत हो तो क्या अल्लाह हो?
सब पसंदें मुख़्तलिफ़ रखते हैं जी,
उर्मिला माधव
12.7.2018

Sunday, 23 June 2024

दायरे में

दायरे में ख़ामियों की ज्यादती ज़्यादह रही है,
इक यही वो बात थी जो दिल कभी समझा नहीं,
#उर्मिलामाधव

Tuesday, 4 June 2024

जारी हुआ

दिल की जानिब से सितम जारी हुआ,
आपसे मिलना बहुत भारी हुआ,
यूँ भी तो मुश्किल थी अपनी ज़िंदगी,
फ़िर इज़ाफ़ी रंज क्यूं तारी हुआ,
उर्मिला माधव

Saturday, 1 June 2024

मुहाल है

ग़म की सियाह रात है जीना मुहाल है,
क्यूँ मुख़्तलिफ़ है इम्तिहाँ अब ये सवाल है,
तनहाइयों से लड़के ग़ुज़ारी है ज़िन्दगी,
अब तक भी हाथ ख़ाली हैं इसका मलाल है। 
उर्मिला माधव.

Thursday, 30 May 2024

आंखें हुईं सियाह

आँखें हुईं सियाह नहीं अपने बस में हूँ
ये ऐसा मस्सला है कि किससे क्या कहूँ
महशर की राह में हूँ मगर फ़िक्र है मुझे,
न हो ज़र्फ़ से मुख़ालफ़त ऐसी जगह रहूँ
उर्मिला माधव..
31.5.2013

महशर-----फ़ैसले का दिन
मुख़ालफ़त-----दुश्मनी

ग़मख़्वार होता है

कभी ऐसे ग़मों से भी जिगर दो चार होता है,
अकेले हम हैं और अपना दिल-ए-बीमार होता है,
अगर हंसने का मौसम हो ज़माना साथ हो लेगा,
कहाँ मुश्किल के लम्हों में कोई ग़म ख़्वार होता है...
#उर्मिलामाधव...
31.5.2015

Thursday, 23 May 2024

त्राहिमाम

इक ज़रा परदा हटाया, मुंह से निकला त्राहिमाम,
कारवां कुछ मुश्किलों का और अपना त्राहिमाम,

अपने एहसासों की दुनिया, दूर सबसे लेगए,
सोचते ही रह गए हम कैसे बचना त्राहिमाम,

हमने इक रस्ता निकाला ओढ़कर ख़ामोशियाँ
दिल भी करता कब तलक रोना बिलखना, त्राहिमाम,
उर्मिला माधव

Monday, 20 May 2024

शादमा

ग़म से भरी थी ज़िंदगी पर हँसके काट दी,
लोगों को ये लगा कि बहुत शादमा थे हम..
#उर्मिलामाधव

Wednesday, 17 April 2024

आह और वाह

हम भी अना पसंद रहे, छोड़ आए सब,
वो आह और वाह का बोझा न सह सके,
उर्मिला माधव

काम फिर कभी

वो सोच ही रहा था कोई ज़ुल्म फिर करूँ,
मैंने उसे बताया नहीं काम फिर कभी..
उर्मिला माधव

Saturday, 13 April 2024

सीख लें

मुश्किलों से दिल लगाना सीख लें,
बे-सबब ही मुस्कुराना सीख लें,
ज़िंदगी में उफ़, नहीं करते हुए,
महफ़िलें तनहा सजाना सीख
लें,
उर्मिला माधव

Monday, 8 April 2024

किसका वक़ार क्या है

किसका वक़ार क्या है,ये जानते नहीं हम,
आखिर जवाब क्या है,क्यूँ ठानते नहीं हम??

किसकी है कारसाज़ी,खारिज़ हैं सब इरादे,
वहम-ओ-सराब क्या है,पहचानते नहीं हम, 

कितनी है जिंदगानी,इसको भरम रखा है,
इसका हिसाब क्या है,कुछ जानते नहीं हम,

गहराई नापते हैं,कमसिन जवानियों की,
हुस्न-ओ-शबाब क्या है!!क्यूँ मानते नहीं हम,

लम्बी ज़बान करके,थूका किये सभी को,
इसमें खराब क्या है,ये छानते नहीं हम....
उर्मिला माधव ...
9.4.2014...

जिस तक पहुंच नहीं है

जिस तक पहुंच नहीं है,वही बादशा हुआ,
वरना ज़मीं के लोग तो हम से ही हैं हुज़ूर..
उर्मिला माधव...
9.4.2017

Saturday, 23 March 2024

आसमान

भले तुम आसमां छूना, ज़मीं पर भी क़दम रखना,
बिना पंखों के उड़ने का नतीजा इक ज़मीं है बस..
उर्मिला माधव

Friday, 15 March 2024

उदासी का

याद है  दिन बहुत उदासी का,
दिल पे है बोझ ग़म शनासी का,
हम ने देखा नहीं किसीकी तरफ़,
ऐसा आलम था बदहवासी का..
उर्मिला माधव

Wednesday, 6 March 2024

सब्ज़ होते हैं

बुजुर्गों की मुहब्बत के सहारे सब्ज़ होते हैं,
हमेशा मुश्किलों के वक़्त वो महसूस होते हैं,
ख़ुशी होती है,गर शादाब बेलें लहलहाती हैं,
शजर के साये,उनके वास्ते,मह्फूज़ होते हैं...
उर्मिला माधव...

सब्ज़---हरे 
शादाब---हरा-भरा 
शजर---पेड़

Sunday, 18 February 2024

देर होगई

अब तुमसे क्या कहें कि बहुत देर होगई,
अब जाएं या रहें कि बहुत देर हो गई..

ता उम्र हम चले हैं इसी एक राह पर,
तब किस से ये कहें कि बहुत देर होगई,
उर्मिला माधव

Monday, 12 February 2024

मुस्कुराते हैं

आज लो फिर से मुस्कुराते हैं,
जब्र ही है तो ग़म मिटाते हैं,

अपनी दुनियां में साफ़ गोई है,
लोग छुप छुप के मुस्कुराते हैं,

हमको है शौक़ डूब जाने का
गो कि क़सदन ही पार जाते हैं,

जब कभी रू ब रू हक़ीक़त हो,
झूट का मुंह कहाँ छुपाते हैं..
उर्मिला माधव

वालिद ए हसनैन

देख लीजै हम कहाँ बेचैन हैं,
अपनी ज़ाती ज़िंदगी पर ऐन हैं,
जो भी कहना है, कहेंगे उम्र भर,
मानो हक़ पर वालिद ए हसनैन हैं..
क्या हुआ जो आपके सक़लैन हैं...
उर्मिला माधव

Sunday, 28 January 2024

ख़याल हुआ

हमको नाहक़ ही ये मलाल हुआ
कुछ न मानी थे इक ख़याल हुआ,
बाद मरने के सांस रुक भी गई,
हौसला किस क़दर हलाल हुआ,
उर्मिला माधव