ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 15 March 2024
उदासी का
याद है दिन बहुत उदासी का,
दिल पे है बोझ ग़म शनासी का,
हम ने देखा नहीं किसीकी तरफ़,
ऐसा आलम था बदहवासी का..
उर्मिला माधव
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