ये मेरे शेर और क़तआत ---
Wednesday, 6 March 2024
सब्ज़ होते हैं
बुजुर्गों की मुहब्बत के सहारे सब्ज़ होते हैं,
हमेशा मुश्किलों के वक़्त वो महसूस होते हैं,
ख़ुशी होती है,गर शादाब बेलें लहलहाती हैं,
शजर के साये,उनके वास्ते,मह्फूज़ होते हैं...
उर्मिला माधव...
सब्ज़---हरे
शादाब---हरा-भरा
शजर---पेड़
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