ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 28 October 2024
दांव पे सारी दौलत
दांव पे सारी दौलत लगा दी गई
एक महफ़िल ही दर पे सजा दी गई,
अपनी तसवीर हर जा बना दी गई
आईनों से हक़ीक़त छुपा दी गई,
एक सीढ़ी कि जिससे गए बाम तक,
भीड़ समझी गई बस हटा दी गई,
उर्मिला माघव
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