ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 25 August 2024
सिलसिला चलता रहा
उसके दिल में ख़ामख़्वा ही सिलसिला,चलता रहा,
मेरी ख़ामोशी से उसको,हर सिला मिलता रहा..
दिल की ये संजीदगी, और उसका वो आवारापन
मेरा उसका राबिता इक शाम सा ढलता रहा,
उर्मिला माधव,
25.8.2017
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