ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 30 May 2024
ग़मख़्वार होता है
कभी ऐसे ग़मों से भी जिगर दो चार होता है,
अकेले हम हैं और अपना दिल-ए-बीमार होता है,
अगर हंसने का मौसम हो ज़माना साथ हो लेगा,
कहाँ मुश्किल के लम्हों में कोई ग़म ख़्वार होता है...
#उर्मिलामाधव...
31.5.2015
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