Monday, 12 February 2024

मुस्कुराते हैं

आज लो फिर से मुस्कुराते हैं,
जब्र ही है तो ग़म मिटाते हैं,

अपनी दुनियां में साफ़ गोई है,
लोग छुप छुप के मुस्कुराते हैं,

हमको है शौक़ डूब जाने का
गो कि क़सदन ही पार जाते हैं,

जब कभी रू ब रू हक़ीक़त हो,
झूट का मुंह कहाँ छुपाते हैं..
उर्मिला माधव

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