ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 14 April 2026
उसे हम बावफ़ा कहते
उसे हम बा-वफ़ा कहते, ठहर जाता किसी सूरत,
जिसे अफ़लाक़ की दुनियां में उड़ना भा गया है अब
परिंदा है तो उसके पंख भी थकने ही हैं इक दिन,
समझता है उसे दुनियां से लड़ना आ गया है अब..
उर्मिला माधव
14.4.2018
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