Tuesday, 21 April 2026

Dhiraj Kant ki गाई हुई ग़ज़ल

क्या दिल का दाम लगाओगे दिल का कोई दाम नहीं होता,
कुछ ऐसे रिश्ते होते हैं जिनका कोई नाम नहीं होता,

क्या बात बताऊं मैं कल की कल क्या होने वाला है,
आग़ाज़ है अपने हाथों में, बस में अंजाम नहीं होता,

दीवानों से ये मत पूछो, हर बात निराली होती है 
नज़रों से बातें करते हैं, लब पे पैग़ाम नहीं होता..
Anonymus 

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