ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 27 April 2026
आज़माता ही रहे
कब तलक कोई किसीको आज़माता ही रहे ?
मोल अपनी चाहतों का क्यूँ चुकाता ही रहे ??
शख़्सियत अपनी मिटाकर बेवजह सजदे करे,
क्यूँ किन्हीं क़दमों में कोई सर झुकाता ही रहे,
Urmila Madhav
28.4.2013
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