ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 25 April 2026
ज़माने लगे हैं
वो ग़ैरों को अपना बताने लगे हैं,
समझने में हमको ज़माने लगे हैं,
हमारी मुहब्बत की तौहीन है ये,
हमीं अपना दामन बचाने लगे हैं,
उर्मिला माधव
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