ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 20 April 2026
जोड़ने जाते रहे
टूटते रिश्तों को फिर-फिर जोड़ने जाते रहे,
और ख़ाली हाथ ले घर लौट कर आते रहे,
इन्तिहाई कोशिशों का सिर्फ़ ये जलवा रहा,
बेवफ़ाई उनकी ठहरी, हम सज़ा पाते रहे।..
Urmila Madhav
21.4.2013
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment