तो समझ तो मुझको ज़रा ज़रा,
वो जो ज़ख़्म मेरा भरा नहीं,
किया फिर से तूने हरा हरा,
मेरा ग़म से सीना फ़िग़ार है
रहे दिल भी सबसे डरा डरा,
इसे तू ही कह क्या ये ठीक है?
हुआ सौदा तुझसे खरा खरा,
लगे चश्मे ख़ुश्क तो ख़ुश्क ही,
है ये दिल तो अब भी भरा भरा.....
उर्मिला माधव
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