ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 23 April 2026
बात रात की
दिन काट ले चले हैं,मगर बात रात की,
ज़्यादा सी क्यूँ लगे है, औक़ात रात की??
जगते रहें या सो रहें,हैं हम ही हम यहाँ,
क्यूँ फ़िक्र उनकी बेवजह,किस-किससे बात की??..
Urmila Madhav
24.4.2013
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