Wednesday, 29 April 2026

साख़ और ईमान

उम्र भर साख़ ओ ईमान संभाला हमने,
ख़ुद को कोने में कहीं, जान के डाला हमने,

जिसको देखो वो गुनहगार कहे जाता था,
दिल के दुखने को बड़ी देर तक टाला हमने,
उर्मिला माधव

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