ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 19 April 2026
ज़माने की नज़र
ज़माने की नज़र बेजा,
ज़माने का क़हर बेजा,
बहुत मासूम थी जिसको,
दिया कैसा ज़हर बेजा।।.
Urmila Madhav
20.4.2013
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