ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 14 April 2026
ख़्वाबों से ऊपर
हर कोई ख़्वाबों से ऊपर झांकता है,
उसपे हैरत ये के शैदाई नहीं,
ज़ुल्मतों के दम पे दुनियां नापता है,
उसपे हैरत ये के बीनाई नहीं,
उर्मिला माधव
14.4.2018
ज़ुल्मत--अंधकार
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment