Saturday, 31 August 2019

मिसाल थे

जो ज़िन्दगी के नाम की जिंदा मिसाल थे,
वो अपनी ज़िन्दगी में....कई बार मर गए .....
उर्मिला माधव...
1.9.2014...

होना है

तन्हा ही तो होना है,
इसपे कैसा रोना है,
ताबिन्दा तक़दीर नहीं,
दिल को दरिया होना है
उर्मिला माधव

घर

उसने दीवारें उठाईं, फ़ासले क़ायम रखे,
हमने छत सर पे उठाली,घर बचाने के लिए
उर्मिला माधव..
1.9.2017

Thursday, 29 August 2019

शर्माओ

शर्माओ मतलब-- शर्माना

आपकी ये उम्र उसपे आशिक़ी ?
ऐ मियां शर्माओ,ये अच्छा नहीं.
उर्मिला माधव..

कुछ अशआर

उम्र भर चलते रहे और दो क़दम पहुंचे नहीं,
ये वो रस्ता है के जिसमें मील का पथ्थर नहीं..
उर्मिला माधव..

कभी एक बार ........मैं बेहोश होकर गिर गई थी,
अब अगर जो होश में आ जाऊं तो दुनियां न देखूं....

दर-ओ-दीवार में ख़ुद खोखले पथ्थर लगाते हैं,
हवा पर थोप कर इल्ज़ाम,अपना सर बचाते हैं....
उर्मिला माधव...

हाँ मैं पत्थर हूँ मुझे तुम तोड़ डालो,
खूब तबियत से मेरी किरचें उछालो,
जब जहाँ चाहे मेरे टुकड़े लगा कर,
तुम दरो दीवार की इज्ज़त बचालो.....
उर्मिला माधव....

दर-ओ-दीवार में ख़ुद खोखले पथ्थर लगाते हैं,
हवा पर थोप कर इल्ज़ाम,अपना सर बचाते हैं....
उर्मिला माधव...

Wednesday, 28 August 2019

तशहीर करूं

इस दर्द को क्या तशहीर करूँ,
किस मुंह से कोई तक़रीर करूँ,
ये अब तक है ..तनक़ीह तलब,
क्या लमहे को .....ज़ंजीर करूँ...
#उर्मिलामाधव
29.8.2015
तशहीर--- ढिंढोरा
तक़रीर---भाषण
तनक़ीह तलब---विचारणीय

फिरते हैं

एक अलग सा ख़याल---
ग़म को संग बांधे-बांधे फिरते हैं,
अपना दम साधे-साधे फिरते हैं,
वो न अब ज़िन्दगी में शामिल है,
देखो हम आधे-आधे फिरते हैं...
#उर्मिलामाधव..
29.8.2015

Tuesday, 27 August 2019

कर रहा है

मेरा दिल चीखने को कर रहा है,
मुझको सन्नाटे बहुत भारी पड़े हैं....
उर्मिला माधव...
27.8 .2016

चलते रहे

दो क़दम पहुंचे नहीं,और उम्र भर चलते रहे,
ये वो रस्ता है के जिसमें मील का पथ्थर नहीं..
उर्मिला माधव..
27.8.2016

देखूं

कभी एक बार ........मैं बेहोश होकर गिर गई थी,
अब अगर मैं होश में आ जाऊं तो दुनियां न देखूं....
उर्मिला माधव....
27.8.2017

Monday, 26 August 2019

नहीं निकली

दिल  से जब आह भी नहीं निकली,
मुदत्तों .........ज़िन्दगी नहीं संभल
जब तिरा.....ज़िक़्र भी गुनाह हुआ,
फिर ये ..आवाज़ भी नहीं निकली..
उर्मिला माधव,
27.8.2017

रसन बोते गए

ठोकरें खाते गए, और फिर खड़े होते गए,
अगली नस्लों के लिए,दार-ओ-रसन बोते गए,
चोट भूले भी नहीं, और चोट फिर से लग गई,
ख़ाब राहत का लिए, चैन-ओ-अमन खोते गए,
उर्मिला माधव
27.8.2019

Sunday, 25 August 2019

करे कोई

हम कोई हाल ही नहीं रखते,
हमको बेहाल क्या करे कोई..
उर्मिला माधव
26.8.2018

Saturday, 24 August 2019

सिखलाया है

रंग मेरी ही सोहबत ने ये दिखलाया है,
रोने वालों को भी हँसना सिखलाया है.
उर्मिला माधव...
25.8.2014...

निजात

Is qadar bhaari pade hain ziist par kuchh haadsaat,
Muntazir hun in gamon se aakhirash ho bhi nijaat...
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इस क़दर भारी पड़े हैं ज़ीस्त पर कुछ हादसात,
मुंतज़िर हूँ इन ग़मों से आख़िरश कब हो निजात...
उर्मिला माधव...
25.8.2015..

खाली करो

एक मतला...

लौट जाओ रंज-ओ-ग़म अब ज़िंदगी ख़ाली करो,
चैन से जीने दो मुझको,यूँ न बदहाली करो,
#उर्मिलामाधव..
25.8.2015

Thursday, 22 August 2019

नूर ए हिंदुस्तान

ग़ैर मुल्क में चर्चे इसके नूर-ए-हिंदुस्तान हुई,
लाशों के अंबार पे बैठी, दिल्ली क़ब्रिस्तान हुई,
लाल किले की दीवारों से,परचम भी लहराता है,
सबको ख़बर है इसके पीछे किसकी जां क़ुर्बान हुई
उर्मिला माधव

घर-घर की

कभी हूँ मां मुहम्मद की, कभी माता हूँ रघुवर की,
मैं हिंदुस्तान की बेटी, कभी बहना हूं घर घर की,
अकेली पासबाँ हूँ मैं, किसी तूफां के आने पर,
चमक रखती हूं सोने सी मैं वो गहना हूँ घर भर की
उर्मिला माधव

Tuesday, 20 August 2019

दूर तलक

जिस्म ही बार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,
के जहां ख़ार नज़र आया ,बड़ी दूर तलक,

हर कलेजे को बहुत देर ठहर छान लिया,
गर्द-ओ गुब्बार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,

जो निगाहों से परखने की कभी जुरअत की,
सिर्फ अग्यार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,

ये नहीं था कि समझ कुछ न कभी आया हो,
हर तरफ़ दार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,

एक भी दिल न फरेबों से कभी खाली रहा,
झूठा गमख्वार नज़र आया,बड़ी दूर तलक,

ख़ुद को सरताज बनाने की बड़ी कोशिश में,
बन्दा अय्यार नज़र आया बड़ी दूर तलक,
उर्मिला माधव...
21.8.2014...
अग्यार--- प्रतिद्वंदी...

आता नहीं

जाओ मत बोलो तुम्हें कुछ बोलना आता नहीं,
बात को कहने से पहले......तोलना आता नहीं,
जाने कैसे साफ़ दिल कहते हो..अपने आपको,
बीच में अहबाब के दिल खोलना आता नहीं..
उर्मिला माधव...
21.8.2014...

मसर्रत

Unwaan-----Masarrat....

कुल ज़माना हो गया है अब हक़ीर,
पिट रही है बस मसर्रत की लकीर,
जिसको देखो ज़ीस्त से हलकान है,
हर कोई कहता है अपने को फ़क़ीर....
::::::;;;
Kul zamana ho gaya hai ab haqir,
Pit rahi hai bas masarrat ki lakir,
Jisko dekho zeest se halkan hai,
Har koi kahta hai apne ko faqir...
उर्मिला माधव...
21.8.2016

बेनक़ाब

कितने क़रीब आके  हुए बे-नक़ाब वो,
हम सोचते रहे के करें रंज या के वाह!!
उर्मिला माधव....
20.8.2016

Monday, 19 August 2019

परवरदिगार मुझको कभी होश में भी ला,
अपनी तरफ़ से मुझको कोई रास्ता दिखा,
इतना थका के रख दिया,इस वक़्त ने मुझे,
अब रोज़ मैं ही आऊँ कभी चलके तू भी आ
20.8.2018

Saturday, 17 August 2019

ज़रूर

जब कभी दिल ग़मज़दा हो,बाँट लीजे कुछ हुज़ूर
और कुछ भी हो न हो,..ये जी तो बहलेगा ज़रूर ...
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jab kabhii dil gamzadaa ho,baant liije kuchh huzoor,
or kuchh bhii ho n ho,........ye jii to bahlegaa zaruur
#उर्मिलमाधव...
18.8.2015...

तय शुदा है

अब तेरे बिन ही जियूँगी ज़िन्दगी ये तयशुदा है,
चूंकि तेरा और मेरा रास्ता बिल्कुल जुदा है
उर्मिला माधव।

आली रहे

जाने कितने मद्फ़नों में मक़बरे ख़ाली रहे,
ज़िन्दगी भर हाफ़िज़ों के मश्वरे जाली रहे,
देने वाला ज़िन्दगी पर इस तरह हावी रहा,
ज्यों अकेला दह्र में ख़ुद अख़्तरे आली रहे,
18.8.2017

Wednesday, 14 August 2019

तन्हाइयां

दिल बड़ा रखते थे,तेरे दर पे आ जाते थे हम,
अब हमें मंज़ूर हैं ता उम्र ये तनहाइयाँ…
उर्मिला माधव..

आशनाई का

नहीं दावा किया हरगिज़ किसी भी आशनाई का,
तुम्हें नक्शा दिखाया बस तुम्हारी बे वफ़ाई का,
उर्मिला माधव

बिहारी मैं

मेरी मजबूरियां हैं अब,कहाँ आऊँ बिहारी मैं
तुझे आना पड़ेगा ख़ुद..मेरी सूनी अटारी में,
उर्मिला माधव।
15 .8 .2017

Tuesday, 13 August 2019

अब भी वही है

कभी ओले,कभी बारिश,कभी तूफ़ान आते हैं,
मगर संजीदगी तौलें तो ज़मीं .अब भी वही है...
#उर्मिलामाधव...
14.8.2015

आज़ाद हुआ

एक लहर ख़ुशी की दौड़ गई जब सुना वतन आज़ाद हुआ,
सब रन्ज-ओ-अलम से टूट गए जो आज़ादी के बाद हुआ
आपस की छीना झपटी में, तक़सीम सभी कुछ कर डाला,
बरपा है क़ह्र परचम के तले इस क़दर वतन बरबाद हुआ..
उर्मिला माधव..
14.8.2016

Sunday, 11 August 2019

मुश्किल रहे

ज़िन्दगी के मरहले,कुछ इस क़दर मुश्किल रहे,
मुख़्तसर ये है के बस यारो खुदा याद आगया ...
#उर्मिलामाधव...
12.8.2015

Saturday, 10 August 2019

क्या कीजिए

दिल जिगर नासाज़ थे ये बात वाजिब ही सही,
पर बला ये है शिकस्ता जिस्म का क्या कीजिये.
उर्मिला माधव,

Friday, 9 August 2019

कराता रहेगा

ये रातें नशीली ये बरखा का आलम,
तेरी याद मुझको.....कराता रहेगा....

जुदाई का ये लुत्फ़ रहने दे यारब,
ये अंदाज़...उल्फत बढ़ाता रहेगा,
उर्मिला माधव
9.8.2014
उर्मिला माधव...
9.8.2014...

भज लो

बहुत की गुज़ारिश,हमारी समझ लो,
तो अब ये है प्यारे,सिया राम भजलो....
उर्मिला माधव....
9.8.2014...

Thursday, 8 August 2019

हसद का रंग

बताएं क्या किसे क्या-क्या तमाशे हैं ज़माने में,
बुज़ुर्गों के भी दामन में हसद का रंग शामिल है.....
उर्मिला माधव ...
9.8.2o16

सुर्खियां

हम लगाते रह गए बस अर्ज़ियाँ,
थाम कर हाथों में अपने सीपियां

रह गए हम आख़री सफ़ में खड़े,
सबने जी भर के समेटीं सुर्ख़ियां,
उर्मिला माधव

जमात हैं

कमज़ोर हैं वो लोग जो ख़ैमों के साथ हैं,
तनहा हैं हम ज़रूर मगर इक बिसात हैं.....
तहज़ीब के ही दायरे ......महदूद हैं हमें,
हाँ भीड़ से अलग हैं मगर इक जमात हैं....
उर्मिला माधव...

Wednesday, 7 August 2019

बचाता भी कैसे

मुहब्बत में ज़िद से बिछुड़ जाने वाला,
भला दिल की क़ीमत लगाता भी कैसे,
मुहब्बत की दुनियां, समझ ही न पाया,
वफाओं की इज़्ज़त ...बचाता भी कैसे,
उर्मिला माधव,
8.8.2017

Tuesday, 6 August 2019

डर से गए

आप दिल से हमारे .......उतर से गए,
या यों कहलें के ऑलमोस्ट मर से गए,
कितनी ऊंची जगह हमने .दी आपको
हमने मिस्टेक कर दी ऑ ..डर से गए..
उर्मिला माधव,
7.8.2017

शुरुआत है

मुझको हर इक सफ़र आख़री सा लगा,
लोग कहते रहे.............ये शुरुआत है,
रात ग़ुज़री तो......दिल ने कहा शुक्रिया,
हर सहर को कहा,.....ख़ूब क्या बात है..
उर्मिला माधव

नक्शा बदल

हरेक सम्त हमें ग़म दिखाई देता है,
अब अपनी आंख का नक्शा बदल लिया जाए,
उर्मिला माधव

हिज्र शनास

हमारी आंख फ़क़त हिज्र से शनासा थी,
हम इतनी भीड़ में चलने की ताब क्या रखते.
उर्मिला माधव
7.8.2018

तंग करते हो

सारी दुनिया में ...,...रंग भरते हो,
ख़ुद ही जीते हो खुद ही मरते हो,
इतने भोले तो हो नहीं ....तुम भी,
ज़िंदगी दे के .........तंग करते हो...
उर्मिला माधव...
6.8.2016

भूल

अपनी हस्ती पर बुलन्दी का ग़ुमाँ रखते हैं जो,
उनके दिल के आईने पर धूल कुछ होगी ज़रूर,
अपने घर में नाक़ाबन्दी का समाँ रखते हैं जो,
इसके मानी ये हुए के भूल कुछ होगी ज़रूर ..
उर्मिला माधव..

Sunday, 4 August 2019

गिरवीं रखीं

एक दिन तो फैसला होगा हमारा आपका,
आपकी आज़ादियाँ गिरवीं रखी हैं, आजकल
उर्मिला माधव

Saturday, 3 August 2019

थाम लो

अपने हाथों से ज़रा दस्तार अपनी थाम लो,
आंधियां झोंके में आती हैं मियां,बचना ज़रा...
उर्मिला माधव..
4.8.2016

काफ़ी हो गए होंगे

तेरे गुलदान के सब फूल .....बासी हो गए होंगे,
तो सूखी पत्तियों के ढेर ......काफ़ी हो गए होंगे,
तुझे कुछ याद है मैंने सलाम-ए-सुब्ह कब भेजा ?
तिरे घर के कई कोने भी ...ख़ाली हो गए होंगे,
उर्मिला माधव,
4.8.2017

जाइये

एक ख़्वाहिश पूछने पे हमने उनसे कह दिया,
आप इतनी हैसियत रखते नहीं हैं,जाइये
उर्मिला माधव

सस्तमोली नमक

वहशतें,वीरानियाँ,बेपर्द हों वाजिब नहीं,
आजकल शीरीनियों से सस्तमोली है नमक,
उर्मिला माधव,
4.8.2018

Friday, 2 August 2019

पांव भर आए हैं

जीवन पथ पर चलते-चलते,पाँव मेरे भर आए हैं,
अद्भुत शीतल छाँव देखकर हम तरुवर तर आए हैं,
हमने चले बहुत लम्बे पथ और दूर कुछ जाना होगा,
करने को विश्राम सहज बस तनिक पाँव फ़ैलाए हैं
हरे भरे यदि वृक्ष न होंगे,पथिक कहाँ विश्राम करेंगे,
बहुत अधिक क्षति हो जाने से थोड़े वृक्ष ही बच पाये हैं..
उर्मिला माधव..
3.8.2013..

इक जमात हैं

कमज़ोर हैं वो लोग जो खेमों के साथ हैं,
तनहा हैं हम ज़रूर मगर एक बिसात हैं.....
तहज़ीब के ही दायरे ......महदूद हैं हमें,
हाँ भीड़ से अलग हैं मगर इक जमात हैं....
उर्मिला माधव...
3.8.2014...

दुआ करे

वो दोस्ती ही क्या है जो साज़िश रचा करे,
खंज़र चलाये पीठ पर....मुंह पर दुआ करे
उनको अता है शुक्रिया........पर्दा हटा गए,
भगवान् उनकी ज़ात का हरदम भला करे.....
उर्मिला माधव....
3.8.2014

Thursday, 1 August 2019

तुम्हारी है

यार ये कैसी दुनियादारी है,
जिसमें दुनिया फ़क़त तुम्हारी है
हम भी तो यां क़याम करते हैं,
अपनी आमद क्या इतनी भारी है?
उर्मिला माधव