सच तो ये है कि सच नहीं ही कहा,
ख़ास किस्सा तो बस छुपा ही रहा,
मैंने ओलम का सिर्फ आ ही कहा,
आ से बस आग और धुंआ ही रहा.....
उर्मिला माधव...
1.7.2014...
Saturday, 30 June 2018
धुआं ही रहा
गुनाह करते रहो
जितने चाहो गुनाह करते रहो,
मुझको बस आगाह करते रहो,
मुझ पे तुम उंगलियाँ उठाया करो,
ख़ुद की बस वाह-वाह करते रहो,
तुम तो लाखों नसीब वाले हो,
अपना ये है कि आह!! करते रहो,
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jitne chaaho,gunaah karte raho,
mujhko bas aagah karte raho,
mujhpe tum ungliyaan uthaayaa karo,
khud kii bas waah-waah karte raho,
tum to laakhon nasiib waale ho,
apnaa ye hai ki aah!! karte raho...
उर्मिला माधव...
1.7.2014...
खून पीती है
hazaaron koshishon par bhi n baazi hamne jeetee hai
tumhari yaad hi to hai,jo din bhar khoon peetee hai..
Urmila Madhav..
30.6.2013
ग़म सुनाया
रोने लगे थे वो भी.....जब मैंने गम सुनाया,
इस पर भी ये सितम है दिल बारहा दुखाया,
उर्मिला माधव...
30.6.2014..
Friday, 29 June 2018
राम कसम
जब से हुआ बिछोह तुम्हारा,तब ही से हम सोये नहीं हैं,
स्वयम अश्रुधारा बहती है...राम कसम हम रोये नहीं हैं,
दुविधाओं ने जीवन घेरा........स्थित-प्रज्ञ हुआ मन मेरा,
कंटक जाल नियति ने सोंपे.....अपने हाथों बोये नहीं हैं ....
#उर्मिलामाधव...
30.6.2015
गीत कहाँ पहचानोगे
जब भावों का संसार नहीं तब गीत कहाँ पहचानोगे?
जब अंतर्मन में पीर नहीं,मन मीत कहाँ पहचानोगे?
और प्रीत नहीं पहचानोगे तो रीत कहाँ से जानोगे?
जब ह्रदय बीच झन्कार नहीं,संगीत कहाँ पहचानोगे?
उर्मिला माधव..
24.7.2013
आए यहां
ऐ निगाहे शौक़ तुमने, मुझको पाया ही कहाँ,
जब भी तुम आये,तो ख़ुद में डूबके आये,यहाँ..
उर्मिला माधव,
30.6.2016
बोझ ढोकर
कैसे इतना बोझ ढो कर आते-जाते हो कहीं?
थक नहीं जाते हो,अपने आप से लड़ते हुए ?
उर्मिला माधव,
30.6 2017
Thursday, 28 June 2018
सोचा नहीं
इश्क़ से बढ़के भी दुनियां में हज़ारों,रंज हैं,
आपने शायद सिवाए इश्क़ कुछ सोचा नहीं...
Urmila Madhav..
29.6.2016
सोपान
सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं...आकर देख,
जन जीवन की रीति यही है.अंतर्दृष्टि जगा कर देख,
जब साहस उत्तुंग हुआ तब रीति-नीति का बिंदु कहाँ,
मार्ग सहज ही मिल जाता है, आगे पाँव बढ़ाकर देख,
उर्मिला माधव...
29.6.2014
इंतिहा करदी
थकान ढोते हुए आख़री सफ़र में रहे,
हमारे वक़्त ने उस पे भी इंतिहा करदी...
उर्मिला माधव
28.6.2018
बाक़ी है
ज़रा बता तो सही,कितनी सांस बाक़ी है
फ़रेब-ओ-मक्र की दुन्या में अब नहीं रहना,
उर्मिला माधव,
28.6.2018
Wednesday, 27 June 2018
ग़ुरूर
सच कहूँ तो ,होगया दिल 'उससे' दूर,
जिसके चेहरे पै , ..लिखा पाया गुरूर,
#उर्मिलामाधव...
28.6.2015...
Monday, 25 June 2018
फ़लसफ़ा देखे
बा-वफ़ा देखे..बे वफ़ा देखे..,
ज़िन्दगी से सभी ख़फ़ा देखे,
कोई मन्ज़िल पे जाके भी रोया,
कोई ...राहों में फ़लसफ़ा देखे.....
उर्मिला माधव..
26.6.2014..
डरती हूं
मैं तो एक ज़िक्र भर ही करती हूँ,
सबसे मिलने में अब भी डरती हूँ,
किस क़दर कौन क्या सुना देगा,
दिल ही दिल में बहुत सिहरती हूँ...
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main to bas zikr bhar hii kartii hun,
sabse milne main ab bhii dartii hun,
kis jagah kaun kyaa sunaa degaa,
dil hii dil main bahut sihartii hun...
उर्मिला माधव...
26.6.2014...
चाह करती हूँ
मैं भी खुशियों की चाह करती हूँ,
अपनी जानिब से,..राह करती हूँ,
मेरे हाथों में कुछ नहीं है.....मगर,
कोशिशें,.........बेपनाह करती हूँ
Urmila Madhav...
26.6.2016
Sunday, 24 June 2018
सोचती हूँ मैं
बताऊँ क्या ज़माने ख़ुद को कितना रोकती हूँ मैं,
भटकती हूँ,संभलती हूँ, मगर कुछ सीखती हूँ मैं,
क़दम थकने लगे हों और खड़े रहना भी मुश्किल हो,
कहीं मैं गिर न जाऊं ख़ुद को इतना थामती हूँ मैं,
अजब मंज़रकशी है ज़िन्दगी ख़ालिस अदावत है,
यहां इंसां की साज़िश का तमाशा देखती हूँ मैं,
तजरुबा उम्र भर का है,मगर अब भी ये आलम है,
तग़ाफ़ुल के इशारों पर भी,सबको चाहती हूँ मैं,
ज़रूरत क्या सवेरा हर नफ़स ग़म में ही पिन्हा हो,
मुहब्बत खो गई क्यों कर हमेशा सोचती हूँ मैं,
उर्मिला माधव
25.6.2017
Saturday, 23 June 2018
काम करदो
aaj tum apni anaa neelaam kardo,
meri khatir koi to ek kaam kardo.
Urmila Madhav..
24.5.2011
बद्दुआ करते हो तुम
किस तसल्ली की दुआ करते हो तुम,
ज़ख्म ही तो बस छुआ करते हो तुम,
ख़ैर ख्वाहों में तो ....हरगिज़ हो नहीं,
हो रहो ..जो कुछ हुआ करते हो तुम,
इसको रब ने कीमती कर के दिया,
ज़िन्दगी को बस जुआ करते हो तुम..
उसकी चाहत क्यूँ तुम्हें दरकार है,
जिसके हक़ में,बद्दुआ करते हो तुम...
उर्मिला माधव,
23.6.2015
तर्जुमानी लिख गया
एक मतला एक शेर...
तरही
वक़्त आकर ज़िन्दगी की तर्जुमानी लिख गया,
कोई आया मेरे दिल पै पानी-पानी लिख गया,
दो घड़ी के वास्ते बस .....राह का साथी बना,
जाने क्या सोचा के सर पै मेहरबानी लिख गया.....
उर्मिला माधव
24.6.2015
जी जनाब
मेरी फरेबी ज़ीस्त का उन्वान था सराब
बाहर से ज़िल्द देख कर,मिलते रहे जवाब,
हमने अज़ीम-ओ-शान से जी ज़िन्दगी ज़रूर,
उम्मीद फिर भी सबको रही,बोलें जी जनाब,
उर्मिला माधव ..
24.6.2017
Friday, 22 June 2018
ख़त
ख़त तुम्हें उसने लिखे हैं छुप-छुपा कर,
आम तुमने कर दिए महफ़िल में ला कर,
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khat tumhen usne likhe hain chhup-chhupaa kar,
aam tumne kar diye...............mahfil main laa kar
उर्मिला माधव...
23.6.2014...
Wednesday, 20 June 2018
सर झुकाते हैं
वहाँ दैर-ओ-हरम अपना जहाँ सब आते-जाते हैं,
बहुत शिद्दत से हम अपनी तमन्ना को निभाते हैं,
न जाने कौन हो कितना मुबारक किसने जाना है
जहाँ दिल सजदे करता हो वहीं हम सर झुकाते हैं...
उर्मिला माधव...
21.6.2013
दूर हैं
Guftgu ka silsila,.........kam hai zaruur,
Iske maani ye nahi ham door:hain
गुफ़्तगू का सिलसिला कम है ज़रूर,
इसके मानी ये नहीं ..... हम दूर....हैं.
#उर्मिलामाधव..
21.6.2015
आ गए हो तुम
तैयार हो गई है मिरी आंख ख़्वाब को,
आहट बता रही है मुझे आ गए हो तुम
उर्मिला माधव
19.6.2018
Tuesday, 19 June 2018
न होते हैं
इरादे अपने अंदर के .कभी ज़ाहिर न होते हैं,
वगरना हम हमेशा ही क़फ़न के साथ होते हैं...
#उर्मिलामाधव
20.6.2015
आ गए हो तुम
तैयार हो गई है मिरी आंख ख़्वाब को,
आहट बता रही है मुझे आ गए हो तुम
उर्मिला माधव
20.6.2017
सोना चाहिए
मुझको जब हर सम्त से सोने की आवाज़ें मिलीं,
मैंने सोचा अब मिरी ...पलकों को सोना चाहिए,
उर्मिला माधव
20.6.2018
Sunday, 17 June 2018
हाल करे
ज़िन्दगी कमाल करे,कैसे-कैसे हाल करे,
जब कोई सवाल करे,कहो क्या बताएँ हम??
हर घड़ी मलाल करे,ऐसी कुछ मिसाल करे,
रंज-ओ-गम बहाल करे,पार कैसे पायें हम ??
उर्मिला माधव..
18.6.2013
घटिया सोच
इतना घटिया सोच कहाँ से लाते हो ??
अफसानों में लोच कहाँ से लाते हो ??
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itnaa ghatiyaa soch kahaan se laate ho ??
afsaanon main loch kahaan se laate ho??
#उर्मिलामाधव..
18.6.2015
वर्जनाएं
जब कभी .....लांघी गई हैं वर्जनाएं,
तब सदा .....आहत हुई हैं भावनाएं,
क्या परिधियां .अर्थ अपने खो चुकीं?
बच रही बस ......चीत्कारें,गर्जनाएं...
उर्मिला माधव...
18.6.2017..
Saturday, 16 June 2018
क्यूँ करली
यूँ मुलाक़ात तुमने क्यूँ करली??
बे-सबब इतनी बात क्यूँ करली??
मेरे सँग तुम कहाँ चले आए ??
लौट लो इतनी रात क्यूँ करली??
उर्मिला माधव..
17.6.2013
जिगर देखूं
इधर देखूँ,उधर देखूँ,बताओ,मैं किधर देखूँ ??
दिखाई तुम ही जब दोगे,तो फिर चाहे जिधर देखूँ ??
सहर देखूँ,महर देखूँ,या दुनियाँ का क़हर देखूँ ??
मुसलसल दर्द है तो फिर,न क्यूँ दर्दे जिगर देखूँ...??
Urmila Madhav.
17.6.2013..
लद गए
हम समझते थे.......बटेरों के ज़माने लद गए,
पर मियाँ जी आज तक भी खूब हैं,ता-हद गए....
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ham samajhte the,bateron ke zamaane lad gaye,
par miyaanjii aaj tak bhii khoob hain,taa-had gaye...
उर्मिला माधव...
17.6.2014...
सुराही साकिया
ज़ुल्फ़,दरिया,शराब आंखें और सुराही साकिया,
इससे हट के ज़िन्दगी में और कुछ है,या नहीं ?
उर्मिला माधव,
17.6.2017
Friday, 15 June 2018
क्या कहना
तू मेरी नज़रों की तलब था ही नहीं क्या कहना ?
वरना हर ग़ाम ज़मीं,तुझको ...खुदी मिल जाती ....
too meri nazron ki talab thaa hii nahin,kahna kya ?
warna har gaam zamiiN tujhko ...khudii mil jaatii ...
उर्मिला माधव
16.6 .2017
Thursday, 14 June 2018
आईना दिखाते हैं
लोग जब आईना दिखाते हैं,
अपने चेहरे को भूल जाते हैं,
रश्क़ दिल में हज़ार रखते हैं,
अश्क़ का ...दायरा बढ़ाते है...
#उर्मिलामाधव...
15.6.2015
समझते हैं
एक शायर दोस्त के नाम ...
हमारा क़द तुम्हारे क़द के सानी है नहीं तो क्या,
बुलाहट की ये झूठी रस्म तुमने क्यों अदा की थी......
हमें कुछ और चाहे आज तक हरगिज़ न आया हो,
ज़ेहन को ठेस पहुँचाने का जज़्बा हम समझते हैं...
#उर्मिलामाधव
15.6.2015
हासिल पर
हसद हो आशिक़ी में तो, ज़रब आ जाए है दिल पर,
हुए मग़रूर नाहक ही,ज़मीन-ओ-ज़र के हासिल पर,
यही सब भूले जाते हैं ....के कुछ क़ायम नहीं रहता,
सफ़ीने डूबते देखे हैं अक्सर .......जाके साहिल पर..
उर्मिला माधव..
15.6.2016
Wednesday, 13 June 2018
आ पहुंचे
घर से निकले,सामने देखा,और वो घर तक आ पहुँचे,
दिल पहले ही तोड़ चुके थे,आज जिगर तक आ पहुंचे,
उर्मिला माधव...
14.6.2015...
Tuesday, 12 June 2018
शान है
दोगले रंगों की ........अपनी शान है,
बस ......यही तो आपकी पहचान है
क्यों बुरा मानो हो जब कहते हैं सब,
एक नंबर का .......ग़ज़ब बेईमान है....
उर्मिलामाधव...
13.6.2015
पथ्थर लगाते हैं
Ek sher ..
Dar-o-deewar men khud khokhle,paththar lagaate hain ,
Hawa par thop kar ilzaam,apna sar bachaate hain..
दर-ओ-दीवार में ख़ुद खोखले पथ्थर लगाते हैं,
हवा पर थोप कर इलज़ाम,अपना सर बचाते हैं..
Urmila Madhav..
13.6.2017
Monday, 11 June 2018
मेरी ही रही
अश्क़बर जो हो गई वो आँख मेरी ही रही,
बा-रहा रुक सी गई वो साँस मेरी ही रही,
आपसे अपने लिए माँगा नहीं कोई मरहम,
जो रही जैसी रही वो आह मेरी ही रही...
उर्मिला माधव
12.6.2013
कर्बला सा हो गया
ये अजब एक वाक़या सा हो गया,
दर्द जब बढ़कर दवा सा हो गया,
अब अकेले हम, हमारे रात-दिन,
दिल हमारा,करबला सा हो गया,
#उर्मिलामाधव् ...
12.6.2015
क़ीमती कहा
सर पर उढ़ाया शान से और ..क़ीमती कहा,
लगता था कुछ क़फ़न सा मगर चूनरी कहा,
इसको विदाई कहते हैं ....क्या ख़ूब रस्म है !!
मर्ग़-ए-बशर की रूह को .क्यूँ ज़िंदगी कहा ??
उर्मिला माधव..
12.6.2017
Sunday, 10 June 2018
नईं होगा
तुझसे मेरा कलाम नईं होगा,
यूँ ही किस्सा तमाम नईं होगा,
ज़िंदगी भर के दाग़ बाक़ी हैं,
इतना आसान काम नईं होगा...
उर्मिला माधव
11.6.2015..
समझाते रहे
जाने वाले बारी-बारी छोड़ कर जाते रहे,
और जो ज़िंदा रहे वो खुद को समझाते रहे..
उर्मिला माधव..
11.6.2015
फ़नकारियाँ
चाँद तारे और फलक,लो हो गई महफ़िल हसीन,
शब बची और हम बचे,और वक़्त की फनकारियां
उर्मिला माधव
11.6.2016
Saturday, 9 June 2018
आलम है
वाह! क्या रोशनी का आलम है !
सब दिखाई देता है क्या ग़म है ?
किसको फ़ुरसत है कौन सोचेगा ?
किसकी दुनियाँ में रोशनी कम है!
उर्मिला माधव
12.1.2013
ज़रूरत है
मैं तो पत्थर पै लिखी ऐसी एक इबारत हूँ,
जिसको पढ़ने के लिए सब्र की ज़रूरत है
उर्मिला माधव
10.6.2013
न झुका हुआ न उठा हुआ
है ये कैसी हैरत-ए-ग़ुफ्तग़ू, न आए समझ में कहा हुआ,
ये कैसी क़िस्म-ए-चराग़ है,न जला हुआ न बुझा हुआ,?
जो है आरज़ू तुझे प्यार की,जाके पा-ए-नाज़ पै सजदा कर,
क्या तू ग़ुम्बद -ए-क़ाबा-ए-फ़ख़्र है? न झुका हुआ न उठा हुआ??........
उर्मिला माधव...
10.6.2013
तक़दीर के
aapne kyaa soch kar tukde kiye tasveer ke,??
kya badal sakte hain isse faisle taqdeer ke ??
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आपने क्या सोच कर टुकड़े किये तस्वीर के ??
क्या बदल सकते हैं इससे फैसले तकदीर के??
उर्मिला माधव...
10.6.2014...
क्यों हो
दरीचे झांकना भी एक तरह एक लत सी होती है,
वगरना कौन क्या करता है ये मालूम ही क्यूँ हो ???
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dareeche khaaknaa bhii ek tarah ek tarah ek lat sii hotii hai,
wagarnaa kaun kyaa kartaa hai......ye maaloom hii kyun ho ??
उर्मिला माधव...
10.6.2014...
देती है
वो मेरे दर्द का .....हर रंग समझ लेता है,
इतनी ख़ामोश वफ़ा,मुझको रुला देती है....
उर्मिला माधव..
10.6.2015
चलें
कितनी ऊँचाई पै जाकर,आएंगे नीचे को हम,
सोच लें जाने से पहले,....हौसला करके चलें...
उर्मिला माधव...
10.6.2016
युग पुरुष
या लिखे गाली कभी और या लिखे लफ़्फ़ज़ियाँ,
और मुहब्बत में लगाए ......कैसी-कैसी बाज़ियाँ,
उसपै ये दावा .....कभी वो राम या फिर कृष्ण है,
टेढ़ी-मेढ़ी हो गईं सब ........उसकी तीरन्दाज़ियाँ
आज का ये युग पुरुष है...
उर्मिला माधव...
10.6.2015..
Friday, 8 June 2018
हटाओ चिलमन
हटाओ चिलमन इधर तो आओ मिलाओ नज़रें कि हम खड़े हैं,
अगर मुहब्बत है तुमको हमसे,तो तुम बड़े हो कि हम बड़े हैं??
क्या ये सही है दरूँ तआल्लुक़ ये सिलसिला भी दर पेश आए??
कि हर जमाल-ओ-अना से लड़के तुम्हारी दहलीज़ पै हम चढ़े हैं..
उर्मिला माधव
9.6.2013
मासूम चेहरे
बहुत मासूम चेहरों की....बड़ी लम्बी कहानी है,
कभी सहमा सा भोलापन,कभी रोती जवानी है
हज़ारों ग़ाम पीछे लौट कर..जब भी ज़रा देखा,
उसी मासूमियत के हाथ......कोरी नातवानी है....
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bahut maasoom chehron kii,badi lambii kahaanii hai,
kabhii sahmaa huaa bachpan,kabhii rotii jawaanii hai,
hazaaron ghaam peechhe laut kar jab bhii zaraa dekhaa,
usii maasoomiyat ke haath korii naatwaanii hai ....
उर्मिला माधव ...
9.6.2017....
परचम
कारवां के साथ में चलते रहे सब उम्र भर,
जो मगर तन्हा चला, परचम उसी के हाथ था..
उर्मिला माधव..
9.6.2017
Thursday, 7 June 2018
शेर
फ़ासले जो आज़्म्तर हैं,......तेरे मेरे दरमियाँ,
जो तेरी ख्वाहिश बहुत थी वो मुक़म्मल हो गई
#उर्मिलामाधव ....
8.6.2015
रोज़ फ़ोटो नया लगाना है
रोज़ फ़ोटो .......नया लगाना है,
याद रखना है,.....याद आना है,
वक़्त को वक़्त कब है भैय्या जी,
ज्यों ही बीता के ..दिन पुराना है..
उर्मिला माधव ...
8.6.2016
दिन में तारे
Ishq men raat bhar hi jagte hain,
Din men taare kahan nikalte hain?
इश्क़ में रात भर ही जगते हैं,
दिन में तारे कहाँ निकलते हैं ☺️
उर्मिला माधव..
8.6.2017
Wednesday, 6 June 2018
चलने लगें
हम चलें और तुम चलो और सब चलने लगें,
वक़्त से पहले ही नाहक़ हाथ क्यूँ मलने लगें ??
रास्ता मुश्किल तो है पर जायेंगे हम हश्र तक,
बे-सबब ही मंजिलों से पहले क्यूँ ढलने लगें ??
उर्मिला माधव..
7.6.2013
ग़मों की इत्तिला
रेल की सीटी सुनी तो दिल धड़क कर थम गया,
ये जुदाई की सदा थी ......और ग़मों की इत्तिला
उर्मिला माधव
7.6.2015..
सितारे
मेरी चुनरी के सितारे ......तुमसे मिलने जाएंगे,
दिल में जड़ लेना उन्हें बस देखना ज़ाया न हों...
#उर्मिलामाधव
7.6.2015
विश्वास घात
कमल मुख पर .आपके....स्पष्ट है विश्वास घात,
डाली-डाली आपकी तो अपने हैं सब पात-पात,
आप जैसा कर रहे हैं,....वैसा ही स्वीकृत भी हो,
है यही निर्णय उचित तो बिछ गई अपनी बिसात,
उर्मिला माधव,
7.7.2017
Monday, 4 June 2018
हंसने वालों में आए
बड़ी मिन्नतों से तो सालों में आये,
यही बात हर दम ख़यालों में आये,
बहुत आरज़ू जिनके दीदार की थी,
वो आये मगर,हंसने वालों में आये,
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badii minnaton se to saalon main aaye,
yahii baat hardam khayaalon main aaye,
bahut aarzoo ..........jinke deedaar kii thii,
wo aaye magar hansne waalon main aaye....
Urmila Madhav...
5.6.2014...
Saturday, 2 June 2018
ख़ूब है
मौत जो देखी तो .......रोये चीख कर,
वाह!! मुस्तक़बिल का डर भी ख़ूब है.....
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maut jo dekhii to ...........roye chiikh kar,
waah..!! mutaqbil ka dar bhi khoob hai
#उर्मिलामाधव...
3.6.2015
शोले हैं
दहकती आग है,पुरवाई है और ग़म के शोले हैं,
कलेजा मुंह को आता है कहीं दामन न जल जाए...
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dahktii aag hai,purwaaii hai or gam ke shole hain,
kaleja munh ko aataa hai kahiin daaman n jal jaaye..
urmila madhv...
4.6.2015..
Friday, 1 June 2018
मलाल है
ग़म की सियाह रात है …...जीना मुहाल है,
क्यूँ मुख़्तलिफ़ है इम्तिहाँ अब ये सवाल है?
तनहाइयों से लड़के .....ग़ुज़ारी है ज़िन्दगी,
अब तक भी हाथ ख़ाली हैं इसका मलाल है।
उर्मिला माधव.
7.3.2o13
जिस्म नीला हो गया
तरही ग़ज़ल...
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वक़्त का अंदाज़ जब बेहद नुकीला होगया,
ज़िन्दगी का तर्जुमा ज़्यादः नशीला होगया,
आंधियां ज़ोरों से आईं हाल कुछ ऐसा हुआ,
ज़ह्र तूफानों में था बस जिस्म नीला होगया,
बारहा हर ग़ाम पर कुछ इम्तिहां होते रहे,
आँख बेशक़ ख़ुश्क है,दामन तो गीला होगया,
जो शजर तनहा खडा है आज तक भी धूप में,
उस शजर का आख़री पत्ता भी पीला होगया
आगया बेसाख्ता लब पर तबस्सुम क्या कहें,
यक़-ब-यक़ जब रेत का काफूर टीला होगया....
उर्मिला माधव...
2.6.2014..
रंग बदल
Jab tumhaare the kabhii qadr nahin kii tumne'
Aaj kahte ho hamen rang badal uthte ham.....??
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जब तुम्हारे थे कभी क़द्र नहीं की तुमने,
आज कहते हो हमें ..रंग बदल उट्ठे हम..!!!
#उर्मिलामाध.....
2.6.2015..
क्या-क्या हैं
हमारे ग़म को यूँ ही हंस के देखने वाले,
तुझे ख़बर ही नहीं,ग़म के रंग क्या-क्या हैं,
::
Hamare gm ko yun hi hans ke dekhne waale,
Tujhe khabar hi nahin gm ke rang kya-kya hain....
Urmila Madhav...
2.6.2016